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क्या इज़रायली सेना थक गई है?

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28 मार्च 2026, 05:28 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

इज़रायली सेना
इज़रायली सेना

नई दिल्ली । डेस्क: इज़रायल के सैन्य गलियारों से छनकर आ रही खबरें अब एक ऐसे संकट की ओर इशारा कर रही हैं, जिसे अब तक केवल बाहरी दुनिया के कयास माना जा रहा था. इज़रायल के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर द्वारा कैबिनेट को दी गई '10 रेड फ्लैग' (खतरे के दस संकेत) की चेतावनी ने इस सवाल को जन्म दे दिया है कि क्या दुनिया की आधुनिकतम सेनाओं में शुमार इज़रायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) अब पूरी तरह थक चुकी है? 


जनरल ज़मीर का यह कहना कि "बिना तत्काल सुधारों के सेना ढहने के कगार पर है," यह दर्शाता है कि एक साथ कई मोर्चों पर जारी युद्ध ने इज़रायल की सैन्य क्षमता और सैनिकों के मानसिक व शारीरिक धैर्य की परीक्षा लेना शुरू कर दिया है.

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अक्टूबर 2023 से पहले जिस इज़रायली सेना की ताकत उसकी चुस्त रणनीति और तकनीक थी, वह अब जनशक्ति (मैनपावर) की भारी कमी और संसाधनों की खींचतान से जूझ रही है.


अत्यधिक सैन्य तैनाती और थकान का बोझ


इज़रायली सेना की थकान का सबसे बड़ा कारण उसका 'रिजर्व सिस्टम' है. युद्ध की शुरुआत में करीब 3 लाख रिजर्व सैनिकों को उनके सामान्य जीवन, नौकरियों और परिवारों से खींचकर मोर्चे पर तैनात किया गया था. अब, मार्च 2026 की ताजा स्थितियों को देखें तो ईरान के साथ बढ़ते तनाव और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ फिर से शुरू हुए जमीनी हमलों के कारण अतिरिक्त 1 लाख रिजर्व सैनिकों को जुटाने का आदेश दिया गया है. 


ये वे लोग हैं जो पेशेवर सैनिक नहीं हैं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक हैं, जो पिछले डेढ़ साल से बार-बार मोर्चे पर बुलाए जा रहे हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले 'कंटीन्यूअस वॉर' के लिए इज़रायली मॉडल कभी तैयार नहीं था. 


सैनिकों में "बर्नआउट" यानी अत्यधिक थकान के लक्षण साफ दिख रहे हैं, जिसके कारण अब कई सैनिकों ने ड्यूटी पर रिपोर्ट करने से मना करना शुरू कर दिया है. यनेट न्यूज के अनुसार, कई रिजर्व सैनिक अब खुलेआम कह रहे हैं कि उनके परिवार आर्थिक रूप से टूट रहे हैं और वे इस 'अंतहीन युद्ध' का हिस्सा बने रहने की मानसिक स्थिति में नहीं हैं.


कई मोर्चों पर एक साथ बिखराव


सेना की थकान केवल गाजा तक सीमित नहीं है. इज़रायली सैनिक इस समय गाजा में हमास के साथ शहरी युद्ध, वेस्ट बैंक में बस्तियों की सुरक्षा, लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों और सीरियाई सीमा पर घुसपैठ का मुकाबला कर रहे हैं. सेंट्रल कमांड के मेजर जनरल एवी ब्लुथ ने स्पष्ट किया है कि वेस्ट बैंक में नई बस्तियों के निर्माण और कब्जे की सरकारी नीतियों ने सैनिकों पर सुरक्षा का भारी बोझ डाल दिया है. 


जब एक ही सैनिक को गाजा की सुरंगों से निकालकर तुरंत लेबनान की पहाड़ियों या वेस्ट बैंक की गलियों में तैनात किया जाता है, तो पेशेवर दक्षता और मनोबल दोनों पर प्रहार होता है. इसके अलावा, रसद और हथियारों की आपूर्ति में आ रही कमी की रिपोर्टें भी जून 2024 से ही सामने आने लगी थीं, जो अब और अधिक गंभीर हो गई हैं.


सामाजिक भेदभाव और भर्ती का संकट


सेना की थकान को राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक भेदभाव ने और भी बदतर बना दिया है. इज़रायल के भीतर ह रेदी (अति-रूढ़िवादी) समुदाय को सैन्य सेवा से मिलने वाली पारंपरिक छूट अब नियमित सैनिकों के लिए घाव पर नमक जैसा काम कर रही है. एक तरफ जहां रिजर्व सैनिक अपनी जान और आजीविका दांव पर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आबादी का एक बड़ा हिस्सा युद्ध सेवा से बाहर है. 


विपक्षी नेता यायर लैपिड का यह कहना कि "सरकार को कायरता छोड़नी चाहिए और ह रेदी समुदाय का ड्राफ्ट अनिवार्य करना चाहिए," सेना के भीतर पनप रहे इसी गुस्से को दर्शाता है. यदि सेना को जल्द ही नई जनशक्ति नहीं मिली, जैसा कि जनरल ज़मीर ने चेतावनी दी है, तो 'रिजर्व सिस्टम' पूरी तरह चरमरा जाएगा. 


इज़रायल की मौजूदा स्थिति यह बताती है कि किसी भी सेना की ताकत केवल उसके टैंकों और विमानों में नहीं, बल्कि उन सैनिकों के मनोबल में होती है, जो अब स्पष्ट रूप से टूटता नजर आ रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP