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GST सुधारों पर विपक्ष का हमला: आठ साल देरी से U Turn

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04 सित. 2025, 06:29 PM 6 मिनट में पढ़ें 1

मल्लिकार्जुन खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे

नई दिल्ली । डेस्क: विपक्ष ने केंद्र सरकार के वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती के फैसले को "आठ साल देरी से लिया गया यू-टर्न" करार दिया है. पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "जीएसटी तर्कसंगतकरण और दरों में कमी का स्वागत है, लेकिन यह कदम आठ साल देर से उठाया गया है. मुझे खुशी है कि सरकार को यह एहसास हुआ कि वे पिछले 8 सालों से गलत रास्ते पर थे और अब यू-टर्न लिया है."


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घोषणा को आधा-अधूरा सुधार बताया. उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने 'एक राष्ट्र, एक कर' को 'एक राष्ट्र, 9 करों' में बदल दिया. इसमें 0%, 5%, 12%, 18%, 28% और विशेष दरें 0.25%, 1.5%, 3% और 6% शामिल हैं." उन्होंने कहा कि यह "जीएसटी 1.5" है, न कि उनकी पार्टी द्वारा लंबे समय से मांगे गए जीएसटी 2.0.


उन्होंने X पर लिखा है, "लगभग एक दशक से, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, GST के सरलीकरण की माँग कर रही है. मोदी सरकार ने “One Nation, One Tax” को "One Nation, 9 Taxes" बना दिया था. जिसमें 0%, 5%, 12%, 18%, 28% के Tax Slabs शामिल थे और 0.25%, 1.5%, 3% व 6% की विशेष दरें थीं. कांग्रेस पार्टी ने अपने 2019 और 2024 के घोषणापत्रों में सरल और तर्कसंगत कर व्यवस्था के साथ GST 2.0 की माँग की थी. हमने GST के जटिल Compliances को भी सरल बनाने की माँग की थी, जिससे MSMEs और छोटे व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए थे. 28 फ़रवरी 2005 को Congress-UPA सरकार ने लोक सभा में GST की औपचारिक घोषणा की थी. 2011 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी जी GST Bill लेकर आए तब भाजपा ने उसका विरोध किया था. जब मोदी जी मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने GST का घोर विरोध किया था.  


आज यही भाजपा सरकार रिकॉर्ड GST Collections का जश्न मनाती है, जैसे कि आम जनता से टैक्स वसूलकर उसने कोई बहुत बड़ा काम किया हो. देश के इतिहास में पहली बार किसानों पर टैक्स लगाया गया है. इस मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र की कम से कम 36 वस्तुओं पर GST थोपा था. दूध-दही, आटा-अनाज, यहाँ तक कि बच्चों की पेन्सिल-किताबें, ऑक्सीजन, insurance और हस्पताल के खर्च जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों पर भी मोदी सरकार ने GST टैक्स थोपा. इसीलिए हमने भाजपा के इस GST को "गब्बर सिंह टैक्स" का नाम दिया. 


कुल GST का दो-तिहाई यानी 64% हिस्सा गरीबों और मध्यम वर्ग की जेब से आता है, लेकिन अरबपतियों से केवल 3% GST वसूला जाता है, जबकि Corporate Tax की दर 30% से घटाकर 22% कर दी गई है. पिछले 5 वर्षों में Income Tax वसूली में 240% की वृद्धि हुई और GST वसूली में 177% की बढ़ोतरी हुई. ये अच्छी बात है कि 8 वर्ष देर से ही सही GST पर मोदी सरकार की कुम्भकर्णीय नींद खुली और उन्होंने जागकर Rate Rationalisation की बात की है.  


सभी राज्यों को 2024-25 को आधार वर्ष मानकर 5 वर्षों की अवधि के लिए Compensation दिया जाए, क्योंकि दरों में कटौती से उनके राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है. GST के जटिल Compliances को भी ख़त्म करना होगा, तभी सही मायने में MSMEs और छोटे उद्योगों को फ़ायदा पहुँचेगा. "


बुधवार को, नरेंद्र मोदी सरकार ने जीएसटी व्यवस्था को सरल करते हुए इसे दो-स्लैब संरचना (5% और 18%) में बदला. साबुन, टूथपेस्ट और भारतीय ब्रेड जैसे घरेलू आवश्यक सामानों पर कर 5% या शून्य कर दिया गया है, जबकि जीवन रक्षक दवाओं को कर से छूट दी गई है. टू-व्हीलर, छोटी कारें, टेलीविजन, एयर कंडीशनर और सीमेंट पर अब 28% के बजाय 18% कर लगेगा. तंबाकू, पान मसाला, एरेटेड ड्रिंक्स और लक्जरी सामान 40% के उच्च कर दायरे में रहेंगे.


कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राज्यों को नुकसान होगा. उन्होंने कहा, "सहकारी संघवाद की भावना में राज्यों की एक प्रमुख मांग, यानी उनकी आय की पूर्ण सुरक्षा के लिए मुआवजे को अगले पांच साल तक बढ़ाने की मांग, अभी तक पूरी नहीं हुई है. यह मांग अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है."


उन्होंने X पर लिखा है, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है- जो दरों की संख्या घटाए, बड़े पैमाने पर उपभोग होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दरें कम करे, टैक्स चोरी, गलत वर्गीकरण और विवादों को न्यूनतम करे, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (जहाँ इनपुट पर आउटपुट की तुलना में अधिक टैक्स लगता है) समाप्त करे, एमएसएमई पर प्रक्रियागत नियमों का बोझ कम करे और जीएसटी के दायरे का विस्तार करे.


केंद्रीय वित्त मंत्री ने कल शाम संवैधानिक निकाय जीएसटी परिषद की बैठक के बाद बड़े ऐलान किए. हालाँकि, जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2025 के अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसके निर्णयों की सारगर्भित घोषणा कर दी थी. क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है?


निजी खपत में कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें और अंतहीन वर्गीकरण विवादों के बीच केंद्र सरकार को अब मानना पड़ा है कि जीएसटी 1.0 अपनी अंतिम सीमा तक पहुँच चुका है. दरअसल, जीएसटी 1.0 की डिज़ाइन ही त्रुटिपूर्ण थी, और कांग्रेस ने जुलाई 2017 में ही इस पर ध्यान दिला दिया था, जब प्रधानमंत्री ने अपना यू-टर्न लेकर इसे लागू करने का निर्णय लिया था. इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ.


कल के घोषणाओं ने सुर्खियाँ बटोरीं क्योंकि प्रधानमंत्री पहले ही प्री-दीवाली डेडलाइन तय कर चुके थे. यह माना जा रहा है कि दर कटौती के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचेंगे. हालाँकि, असली जीएसटी 2.0 का इंतज़ार अभी भी जारी है. क्या यह नया जीएसटी 1.5 (अगर इसे ऐसा कहा जा सके) निजी निवेश, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा- यह देखना बाकी है. क्या इससे एमएसएमई पर बोझ कम होगा - यह तो समय ही बताएगा.


इस बीच, राज्यों की एक अहम मांग, जो कि सहकारी संघवाद की सच्ची भावना से की गई थी-यानी राजस्व की पूर्ण सुरक्षा के लिए पाँच और वर्षों तक मुआवज़ा अवधि का विस्तार -अभी भी अनसुलझी है. वास्तव में, दर कटौती के बाद इस मांग का महत्व और भी बढ़ गया है."


केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने कहा कि राज्य को सालाना 8,000-10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. उन्होंने कहा, "राज्य जीएसटी दरों में कटौती का समर्थन करता है, जो कीमतें कम करेगा, लेकिन केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दरों में कटौती का लाभ आम आदमी तक पहुंचे."


गैर-भाजपा शासित राज्यों ने संभावित 50,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान पर चिंता जताई. कर्नाटक, पंजाब और पश्चिम बंगाल ने बुधवार को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में राजस्व नुकसान के स्पष्ट अनुमानों और मुआवजे की गारंटी की मांग की.


तृणमूल कांग्रेस ने बीमा छूट पर जीत का दावा किया. पार्टी ने कहा, "यह आम लोगों की जीत है, जो एक असंवेदनशील सरकार से छीनी गई है, जो केवल दबाव में सुनती है." उसने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को "जन-विरोधी" कर का विरोध करने का श्रेय दिया.


पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुधार को भाजपा की घटती लोकसभा सीटों से जोड़कर तंज कसा. उन्होंने कहा, "जब भाजपा की लोकसभा सीटें 303 से घटकर 240 हुईं, तो आयकर कम हुआ और जीएसटी स्लैब भी कम हुए. 63 सीटों के नुकसान से इतने लाभ मिले, अगर भाजपा की सीटें 150 और कम हों, तो जनता को और भी लाभ मिलेगा."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP