GST में सुधार का वादा राहुल गांधी की जीत- कांग्रेस
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को लाल किले से अपने वार्षिक भाषण में वस्तु एवं सेवा कर (GST) में सुधार का वादा किया है. जिसे विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अक्सर 'गब्बर सिंह टैक्स' कहते रहें हैं. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे अपनी जीत के रूप में पेश किया है, क्योंकि पार्टी पिछले 18 महीनों से GST 2.0 में मूलभूत बदलाव की मांग कर रही थी.
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शनिवार को एक बयान में कहा, "पिछले 18 महीनों से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस GST 2.0 में मूलभूत बदलाव की मांग कर रही है. आखिरकार, प्रधानमंत्री ने समझ लिया कि जब तक इन बदलावों को लागू नहीं किया जाता और उपभोग व खर्च में पर्याप्त वृद्धि नहीं होती, तब तक विकास की प्रक्रिया तेज नहीं होगी."
प्रधानमंत्री ने 'अगली पीढ़ी के GST सुधार' लाने का वादा किया, जो आम आदमी पर कर का बोझ कम करेगा.
उन्होंने कहा कि यह दैनिक आवश्यकताओं पर कर को कम करेगा, जिससे MSME, स्थानीय विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को लाभ होगा, साथ ही यह आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा और एक अधिक कुशल, नागरिक-अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाएगा.
रमेश ने कहा कि GST के तहत लगाए गए कर की दरों को कम करना आवश्यक है.
उन्होंने कहा, "कर संरचना को इस तरह सरल करना होगा कि राज्यों को राजस्व का नुकसान न हो और वर्गीकरण विवाद भी कम हों, जो अब बहुत आम हो गए हैं. GST मुआवजा उपकर 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहा है. इसकी समय सीमा को बढ़ाना होगा ताकि GST दरों में पुनर्गठन के बाद राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई हो सके."
उन्होंने यह भी कहा कि MSME, जो रोजगार का बड़ा हिस्सा प्रदान करते हैं, को पर्याप्त संरक्षण देना चाहिए.
अप्रत्यक्ष कर सुधार की शुरुआत 39 साल पहले तत्कालीन वित्त मंत्री वी.पी. सिंह के समय शुरू हुई थी और इसे 2017 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लागू किया गया था. उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने UPA सरकार के दौरान GST का कड़ा विरोध किया था.
रमेश ने सुझाव दिया कि सरकार को इस मुद्दे पर व्यापक बहस के लिए तुरंत एक आधिकारिक चर्चा पत्र शुरू करना चाहिए. उन्होंने कहा, "GST को वास्तव में 'अच्छा और सरल' होना चाहिए, न कि वह विकास को दबाने वाला कर, जैसा कि यह अब बन गया है."
राहुल गांधी ने 23 अक्टूबर, 2017 को गुजरात के गांधीनगर में एक जनसभा में पहली बार GST को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहा था. तब से वे इस शब्द का बार-बार उपयोग करते रहे हैं. इस साल 1 जुलाई को, GST की शुरुआत की पांचवीं वर्षगांठ पर, राहुल ने इसे 'आर्थिक अन्याय और कॉरपोरेट पक्षपात का क्रूर हथियार' करार दिया था.
उन्होंने कहा, "इसे गरीबों को दंडित करने, MSME को कुचलने, राज्यों को कमजोर करने और प्रधानमंत्री के कुछ अरबपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया था. 'अच्छा और सरल कर' का वादा किया गया था, लेकिन इसके बजाय भारत को अनुपालन का दुःस्वप्न और पांच-स्लैब कर व्यवस्था मिली, जिसे 900 से अधिक बार संशोधित किया गया है."
राहुल के समर्थकों ने GST सुधार को उनकी एक और जीत के रूप में देखा. उनके समर्थकों ने अक्सर GST, नोटबंदी और जाति जनगणना (जिसे मोदी सरकार को घोषित करना पड़ा) के खिलाफ उनके विरोध को उनकी उपलब्धियों के रूप में गिनाया है.
राहुल ने GST की नौकरशाही-निर्भर प्रकृति की आलोचना की है, जो उनके दावे के अनुसार बड़े कॉरपोरेट्स को लाभ पहुंचाती है, जिनके पास भारी कागजी काम को संभालने के लिए संसाधन और जनशक्ति है. पिछले महीने उन्होंने दावा किया था कि GST लागू होने के बाद से 18 लाख MSME बंद हो चुके हैं.
राहुल और बंगाल जैसे विपक्ष शासित राज्यों के नेताओं ने यह भी शिकायत की है कि मोदी सरकार ने गैर-भाजपा शासित राज्यों, जैसे कर्नाटक, को दंडित करने के लिए GST का हथियार के रूप में उपयोग किया है.