GST में कटौती से सड़क परिवहन और ऑटोमोबाइल क्षेत्र को प्रोत्साहन
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में सड़क परिवहन और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. इस बैठक में दोपहिया वाहनों, कारों, बसों, ट्रैक्टरों, वाणिज्यिक वाहनों और ऑटो-कंपोनेंट्स पर जीएसटी दरों में कमी को मंजूरी दी गई.
जीएसटी दरों में परिवर्तन
सरकार का दावा है कि जीएसटी परिषद ने विभिन्न वाहन श्रेणियों और ऑटो-कंपोनेंट्स पर कर की दरों में कमी की है, जो न केवल वाहनों को किफायती बनाएगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स दक्षता, रोजगार सृजन और स्वच्छ गतिशीलता को भी बढ़ावा देगी. नई दरें निम्नलिखित हैं:
*दोपहिया वाहन (<350 सीसी): 28% से घटाकर 18% - युवाओं, ग्रामीण परिवारों और श्रमिकों के लिए किफायती गतिशीलता.
*छोटी कारें: 28% से घटाकर 18% - छोटे शहरों और मध्यम वर्ग में कारों की मांग को बढ़ावा.
*बड़ी कारें: 28% + उपकर से बढ़ाकर 40% (फ्लैट) - सरल कराधान और पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पात्रता.
*ट्रैक्टर (<1800 सीसी): 12% से घटाकर 5% - भारत की वैश्विक ट्रैक्टर हब स्थिति को मजबूती, कृषि मशीनीकरण को प्रोत्साहन.
*बसें (10+ सीटर): 28% से घटाकर 18% - किफायती सार्वजनिक परिवहन और बेड़े के विस्तार को समर्थन.
*वाणिज्यिक माल वाहन: 28% से घटाकर 18% - माल ढुलाई लागत में कमी, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती.
*ऑटो-कंपोनेंट्स: 28% से घटाकर 18% - सहायक एमएसएमई और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन.
*माल ढुलाई बीमा: 12% से घटाकर 5% (आईटीसी के साथ) - परिवहन संचालकों की परिचालन लागत में कमी.
ये नई दरें 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगी.
ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर प्रभाव
जीएसटी दरों में इस कटौती से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कई स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. वाहनों की कीमतों में कमी से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी, जिससे विनिर्माण, बिक्री, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. विशेष रूप से, यह कदम निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा:
*रोजगार सृजन और एमएसएमई को प्रोत्साहन: ऑटो और संबद्ध क्षेत्रों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है. टायर, बैटरी, कांच, स्टील, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सहायक उद्योगों में छोटे व्यवसायों को अप्रत्याशित वृद्धि मिलेगी. ड्राइवरों, मैकेनिकों, गिग श्रमिकों और सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर बढ़ेंगे.
*स्वच्छ और सुरक्षित गतिशीलता: पुराने, प्रदूषणकारी वाहनों को ईंधन-कुशल मॉडलों से बदलने को प्रोत्साहन मिलेगा. बसों और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ और कार्बन उत्सर्जन कम होगा.
*लॉजिस्टिक्स और निर्यात में सुधार: माल ढुलाई लागत में कमी से कृषि, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी. यह प्रधानमंत्री गति शक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा.
*वित्तीय समावेशन: एनबीएफसी, बैंकों और फिनटेक के माध्यम से ऋण-संचालित वाहन खरीद में विस्तार होगा, जिससे अधिक लोग वाहन खरीद सकेंगे.
राष्ट्रीय पहलों को समर्थन
यह सुधार मेक इन इंडिया और पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय पहलों को सुदृढ़ करता है. कर ढांचे को सरल और स्थिर बनाकर, भारत विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों, परिवहन संचालकों और एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा. यह कदम किफायती, कुशल और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नागरिकों के लिए जीवनयापन और उद्यमों के लिए व्यापार में आसानी सुनिश्चित करेगा.