भूजल तेजी से हो रहा है खत्म, देश के 193 जिलों की स्थिति चिंताजनक
नई दिल्ली । डेस्क: भूजल का स्तर तेजी से कम हो रहा है, और देश के 193 जिलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है. उन राज्यों में जहां जल संकट गहरा गया है, उत्तर प्रदेश इस सूची में शीर्ष पर है. इसके बाद राजस्थान और तमिलनाडु का स्थान है.
छत्तीसगढ़ में भूजल निकासी का स्तर सामान्य रूप से नियंत्रित है, और राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति "सुरक्षित" श्रेणी में आंकी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 6,746 मूल्यांकन इकाइयों (ब्लॉक/मंडल/तालुका) में से छत्तीसगढ़ के अधिकांश ब्लॉक 70% से कम भूजल निकासी के साथ "सुरक्षित" श्रेणी में हैं.
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में भूजल निकासी का स्तर अधिक हो सकता है, लेकिन यह पंजाब, हरियाणा, या राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में कम गंभीर है, जहां निकासी 100% से अधिक है.
केंद्र सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों से वर्षा जल संरक्षण जैसे कार्यक्रमों को लागू किया है. इस संबंध में विभिन्न राज्यों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश भी भेजे गए हैं. इस साल पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में वर्षा जल संरक्षण का कार्यक्रम शुरू किया गया है. 2024 में पश्चिम बंगाल के तीन जिलों-झाड़ग्राम, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा में भी इस तरह के कार्यक्रम लागू किए गए थे.
जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है. उनका सवाल है कि क्या अब अंत का समय निकट आ रहा है? यदि भूजल खत्म होता रहा, तो जीव-जगत का विनाश केवल समय की बात होगी. पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मुद्दे पर और अधिक जागरूकता की आवश्यकता है.
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी ने बताया कि भूजल की स्थिति का आकलन करने के लिए 2022 से सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड और विभिन्न राज्य सरकारें संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कर रही हैं. हर साल इस संबंध में समीक्षा की जाती है. इसके आधार पर 2024 में सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने 'नेशनल कम्पाइलेशन ऑफ डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया, 2024' नामक एक रिपोर्ट प्रकाशित की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 193 जिलों में जल संकट पैदा हो रहा है.
इतना ही नहीं, इनमें से 102 जिलों को 'ओवर एक्सप्लॉइटेड' के रूप में चिह्नित किया गया है, 22 जिलों को 'क्रिटिकल' और 69 जिलों को 'सेमी-क्रिटिकल' की श्रेणी में रखा गया है.
हालांकि जल संकट वाले जिलों की कुल संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, लेकिन 'ओवर एक्सप्लॉइटेड' जिलों की संख्या के मामले में राजस्थान सबसे आगे है. इस राज्य के 29 जिलों में भूजल सबसे तेजी से खत्म हो रहा है.
इन 193 जिलों में पश्चिम बंगाल का भी एक जिला शामिल है, जो 'सेमी-क्रिटिकल' श्रेणी में है. हालांकि, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने अपने आंकड़ों में किसी भी जिले का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया है.