'अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों पर कानून का दुरुपयोग बंद करे सरकार'- अभिजीत दिपके
नई दिल्ली । डेस्क: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नोएडा में प्रदर्शनकारी श्रमिकों पर हुई कार्रवाई की एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों के खिलाफ कानून का दुरुपयोग तुरंत बंद करना चाहिए.
दिपके ने एक प्रमुख समाचार पत्र की जांच रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें बताया गया था कि इस साल अप्रैल में नोएडा में एक हफ्ते तक चले आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लगभग 200 निजी कंपनियों के कर्मचारियों को अदालत से जमानत मिलने से पहले औसतन 53 दिन जेल में बिताने पड़े.
अदालत ने भी मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि पुलिस कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रही, बल्कि केवल विरोध स्थल पर मौजूदगी के आधार पर कार्रवाई की गई.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदर्शन के बाद वेतन दरों में बढ़ोतरी कर दी थी, फिर भी श्रमिकों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा. गिरफ्तार किए गए दो श्रमिकों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसी कठोर धाराएं भी लगाई गईं, जिसके तहत लंबी हिरासत की अनुमति होती है.
इस पर सवाल उठाते हुए सीजेपी प्रमुख ने पूछा कि शुरुआती कार्रवाई के वक्त पुलिस द्वारा किए गए दावों और "पाकिस्तान लिंक" के आरोपों का आखिर क्या हुआ? उन्होंने कहा, "जो उन्होंने नोएडा के श्रमिकों के साथ किया, अब वही छात्रों के साथ दोहराने की कोशिश कर रहे हैं. इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 25 जुलाई को राष्ट्रव्यापी आंदोलन वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की समीक्षा के लिए सीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. संगठन का आरोप है कि आंदोलन वापस लेने के बावजूद वादों को पूरा करने की दिशा में सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक संवाद नहीं हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी 18 अगस्त की सुनवाई के दौरान देश भर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की समेकित सूची मांगी थी.
सीजेपी के अनुसार, शीर्ष अदालत ने केंद्र से तीन बार यह सूची देने को कहा ताकि अनुच्छेद 142 के तहत मुकदमों को रद्द करने पर विचार किया जा सके, लेकिन संघ सरकार ने सूची सौंपने पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई. संगठन का कहना है कि सरकार के इस रुख से युवाओं और छात्र समुदाय के साथ वादाखिलाफी का अंदेशा गहरा गया है.