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आधार-जैसी IDs का वैश्विक विस्तार 'खतरनाक'

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10 दिस. 2025, 12:56 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

आधार कार्ड
आधार कार्ड

नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय सिविल सोसाइटी समूह और व्यक्तिगत हस्ताक्षरकर्ताओं ने दुनिया भर के देशों में भारत के आधार जैसी डिजिटल पहचान प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के खिलाफ आवाज़ उठाई है. कुल 54 सिविल सोसाइटी समूहों और 200 से अधिक व्यक्तिगत हस्ताक्षरकर्ताओं ने एक खुला पत्र जारी करते हुए इस कदम की आलोचना की है.


पत्र में कहा गया है, "हम, चिंतित भारतीय नागरिक और संगठन, इस बात से स्तब्ध हैं कि अन्य देशों में भी आधार के समान बायोमेट्रिक पहचान प्रणालियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं."


डिजिटल अधिकारों की वकालत करने वाले समूह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन, जमीनी स्तर के सूचना के अधिकार आंदोलन मजदूर किसान शक्ति संगठन, जेएनयू छात्र संघ, सफाई कर्मचारी आंदोलन, और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) जैसे संगठनों ने इस दो-पृष्ठ के पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. पूर्व एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अध्यक्ष आकार पटेल, कार्यकर्ता जीन ड्रेज़, और संवैधानिक कानून के विद्वान गौतम भाटिया जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भी इसका समर्थन किया है.


भारत सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के एक प्रमुख आधार के रूप में आधार जैसी डिजिटल पहचान प्रणालियों को विश्व स्तर पर बढ़ावा दे रही है, जिसके लिए मॉड्यूलर ओपन सोर्स आइडेंटिटी प्लेटफॉर्म (MOSIP) जैसे ओपन सोर्स उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं. IIIT बैंगलोर द्वारा विकसित MOSIP, जिसे भारत का समर्थन प्राप्त है, मोरक्को, फिलीपींस, श्रीलंका, इथियोपिया और युगांडा जैसे देशों के साथ विभिन्न स्तरों पर जुड़ा हुआ है.


मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि आधार एक "सामाजिक नियंत्रण का खतरनाक उपकरण बन सकता है, खासकर किसी सत्तावादी सरकार के हाथों में." पत्र में कहा गया है कि विभिन्न डेटाबेस को आधार से जोड़ने से "प्रोफाइलिंग का खतरा बढ़ जाता है." इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय डेटाबेस साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील है, और डेटा में त्रुटियों की संभावना भी है.


हालांकि, सरकार लगातार डेटा सुरक्षा जोखिमों से इनकार करती रही है और जोर देती है कि आधार सेवाओं तक अधिक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने में सहायक रहा है. पत्र में उठाए गए कई मुद्दे 2018 में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाजी का विषय थे, जहाँ शीर्ष अदालत ने इस योजना की संवैधानिकता को बरकरार रखा था.


हालांकि, पत्र में आरोप लगाया गया है कि सरकार अदालत के फैसले के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है. पत्र में कहा गया है, "हर कदम पर, आधार परियोजना अपने आप में एक कानून रही है," यह बताते हुए कि यह बिना किसी कानूनी आधार के शुरू हुआ था, और बाद में संसद के ऊपरी सदन को दरकिनार करके आधार अधिनियम पारित किया गया. इसमें UIDAI पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों (जैसे बच्चों के लिए सुरक्षा और निजी संस्थाओं द्वारा उपयोग के विरुद्ध) का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया है.


पत्र का निष्कर्ष है, "आधार के प्रमोटर कभी भी इस विशेष पहचान मॉडल को सही नहीं ठहरा पाए या यह नहीं बता पाए कि यह किन बुराइयों को ठीक करने वाला है. इसके बजाय, उन्होंने इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रचार पर भरोसा किया."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP