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भारत में किशोरियों को मुफ्त HPV टीका: सर्वाइकल कैंसर से मिलेगी सुरक्षा

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24 फ़र. 2026, 02:40 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

HPV Vaccine
HPV Vaccine

नई दिल्ली । डेस्क: भारत सरकार देश में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही 14 वर्ष की आयु की किशोरियों के लिए राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करेगा. यह टीकाकरण पूरी तरह से स्वैच्छिक और निःशुल्क होगा, जिसे सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. 


इस अभियान के तहत 'गार्डासिल' (Gardasil) नामक क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा, जो एचपीवी टाइप 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है (जो सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारक हैं) और साथ ही टाइप 6 और 11 से भी बचाव करती है. स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक प्रमाणों से स्पष्ट है कि इस आयु वर्ग में दी गई वैक्सीन की एक खुराक भी लंबे समय तक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है.


यह टीकाकरण विशेष रूप से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों जैसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध होगा. गावी (Gavi) के साथ साझेदारी और वैश्विक खरीद तंत्र के माध्यम से सरकार ने टीकों की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की है. 


भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके कारण हर साल लगभग 42,000 मौतें होती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम वायरस के संपर्क में आने से पहले ही किशोरियों को सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, जिससे भविष्य में कैंसर के मामलों में भारी कमी आएगी. वैश्विक स्तर पर 90 से अधिक देश पहले ही इस तरह के अभियान को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं, जिससे संक्रमण की दर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है.


सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से गर्भाशय के निचले हिस्से यानी 'सार्वाइक्स' की कोशिकाओं में होने वाला कैंसर है, जो धीरे-धीरे विकसित होता है और समय रहते पहचान न होने पर घातक हो सकता है. यह कैंसर विशेष रूप से महिलाओं को होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके प्रजनन तंत्र से जुड़ा है. 


इस कैंसर का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण 'ह्यूमन पेपिलोमावायरस' (HPV) का संक्रमण है, जो एक बहुत ही सामान्य वायरस है और असुरक्षित शारीरिक संबंधों के माध्यम से फैलता है. जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस को खत्म नहीं कर पाती, तो यह वायरस गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में लंबे समय तक बना रहता है और धीरे-धीरे उन्हें कैंसर कोशिकाओं में बदल देता है. 


इसके अलावा कम उम्र में शादी होना, एक से अधिक शारीरिक साथी, व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी और धूम्रपान भी इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा देते हैं.


सर्वाइकल कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का पता किस चरण में चला है. यदि इसकी पहचान शुरुआती चरणों में हो जाती है, तो सर्जरी के जरिए प्रभावित हिस्से को हटाकर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. इसके अलावा, कैंसर की स्थिति के अनुसार रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है ताकि कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जा सके. 


आधुनिक चिकित्सा में 'इम्युनोथेरेपी' और 'टारगेटेड थेरेपी' का भी इस्तेमाल होने लगा है. इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका 'एचपीवी वैक्सीन' (HPV Vaccine) लगवाना है, जो शरीर को वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है. डॉक्टरों की सलाह है कि किशोरियों को यौन सक्रिय होने से पहले ही यह टीका लगवा लेना चाहिए ताकि उनके शरीर में मजबूत एंटीबॉडी बन सकें. 


टीकाकरण के साथ-साथ, महिलाओं को नियमित रूप से 'पैप स्मीयर' (Pap Smear) टेस्ट भी करवाते रहना चाहिए ताकि किसी भी असामान्य कोशिका वृद्धि का शुरुआती दौर में ही पता चल सके और समय पर इलाज शुरू हो सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP