जस्टिस भुइयां की टिप्पणी पर पूर्व CJI गवई ने याद दिलाई न्यायिक मर्यादा
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची को लेकर की गई एक सार्वजनिक टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है. भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई और दिल्ली उच्च न्यायालय के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने जस्टिस भुयान के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि जब यह मामला पहले से ही शीर्ष अदालत में विचाराधीन है, तो इस पर कोई भी सार्वजनिक टिप्पणी करना न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है.
नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा था कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया असंवैधानिक और मनमानी है. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान देश में दो श्रेणी के नागरिक बनाने की इजाजत नहीं देता.
जस्टिस भुइयां की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व CJI बी.आर. गवई ने कहा कि एक मौजूदा न्यायाधीश को उस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए जो उसी अदालत के समक्ष लंबित है.
पूर्व जज एस.एन. धींगरा ने इसे सिटिंग जज की सीमाओं से बाहर का बयान बताया और कहा कि कोई भी बयान देने से पहले तथ्यों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है.
वहीं पूर्व जज आर.एस. सोढी ने स्पष्ट किया कि मतदान का अधिकार कानून द्वारा तय होता है और इस तरह के मामलों में सख्त या आक्रामक भाषा के बजाय कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया के पालन पर ध्यान देना चाहिए.
गौरतलब है कि चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया से जुड़ी कई याचिकाएं फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, जिसके चलते इस बयान को लेकर कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.