आदिवासियों ने कहा-वन विभाग के आरोप झूठे
गरियाबंद | संवाददाता: गरियाबंद जिले से वन संरक्षण से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की सैकड़ों एकड़ जमीन पर कथित अवैध कटाई और अतिक्रमण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है.
इस मामले में नोटिस जारी होने के बाद कुल 166 लोगों ने गुरुवार को वन विभाग के समक्ष अपना लिखित जवाब दाखिल किया.
उपनिदेशक कार्यालय में जमा किए गए इन जवाबों में सभी ने एक सुर में आरोपों को नकारते हुए खुद को 'प्रकृति के संरक्षक' बताया है.
उनका कहना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह उनके पूर्वजों की है और वे वर्षों से यहां खेती करते आ रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने न तो वन कानूनों का उल्लंघन किया है और न ही किसी तरह की अवैध कटाई की है.
आरोपियों ने विशेष रूप से गृह ग्राम जैतपुरी के पास स्थित कक्ष क्रमांक 324 का जिक्र करते हुए कहा कि यह इलाका उनकी निजी भूमि की सीमा में आता है. उनके मुताबिक, वहां लगातार सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई या जमीन की सफाई जैसी गतिविधियां होना संभव ही नहीं है.
दूसरी ओर, वन विभाग इस पूरे मामले को गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन मान रहा है. उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, कार्रवाई ठोस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई है.
उन्होंने बताया कि सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि वर्ष 2005 के बाद, खासतौर पर 2010 से 2022 के बीच, इस क्षेत्र में तेजी से जंगल साफ किया गया. आंकड़ों के अनुसार, 2011 तक करीब 45 हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई दर्ज की गई थी, जो अगले एक दशक में बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गई.
केवल डिजिटल प्रमाण ही नहीं, बल्कि वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भौतिक साक्ष्य भी जुटाए हैं. जांच के दौरान कई स्थानों पर पेड़ों के ठूंठ, जले हुए अवशेष और साफ किए गए क्षेत्र पाए गए. इन सभी का विधिवत पंचनामा तैयार किया गया है, जिसे अब केस का हिस्सा बनाया गया है.
इस पूरे प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. विभाग का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्य न्यायालय में पेश किए जाएंगे, जहां तथ्यों के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
फिलहाल, एक तरफ जहां स्थानीय लोग अपने पारंपरिक अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग पर्यावरण संरक्षण और कानूनी उल्लंघन का मुद्दा उठा रहा है.