ट्रंप की टैरिफ की धमकी के बाद कनाडा में "buy Canadian" अभियान
ओटावा । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडाई सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की ताजा धमकी के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देशवासियों से "बाय कनाडाई" (कनाडाई उत्पाद खरीदें) का आह्वान किया है. कार्नी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि जब हमारी अर्थव्यवस्था को विदेशों से खतरा हो, तो हमें उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा अब अपनी आत्मनिर्भरता पर जोर देगा और "अपना सर्वश्रेष्ठ ग्राहक खुद बनेगा."
यह विवाद तब गहराया जब डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को चेतावनी दी कि यदि कनाडा चीन के साथ कोई व्यापारिक समझौता करता है, तो अमेरिका से कनाडा आने वाले सभी सामानों पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया जाएगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मार्क कार्नी को "गवर्नर कार्नी" कहकर संबोधित किया, जो उनके उस पुराने विवादास्पद सुझाव की ओर इशारा करता है जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनने की बात कही थी.
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह धमकी साधारण व्यापारिक घर्षण से कहीं आगे निकलकर तीसरे देश के साथ कनाडा के संप्रभु व्यापारिक संबंधों में हस्तक्षेप करने की कोशिश है.
इस तनाव की जड़ें मार्क कार्नी की हालिया चीन यात्रा और दावोस में दिए गए उनके भाषण में छिपी हैं. कार्नी ने जनवरी के मध्य में चीन का दौरा किया था, जिसके बाद कनाडा ने 49,000 चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को कम टैरिफ पर अनुमति देने का निर्णय लिया.
बदले में, चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों और कैनोला पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर सहमति जताई.
हालांकि ट्रंप ने पहले इस सौदे का स्वागत किया था, लेकिन अब उन्होंने अचानक अपना रुख बदलते हुए इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया है. चीन के विदेश मंत्रालय और व्यापार विशेषज्ञों ने अमेरिकी रुख की आलोचना करते हुए इसे संप्रभु देशों के आपसी सहयोग में अनुचित दखल करार दिया है.
कनाडा के मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि वे चीन के साथ कोई पूर्ण "मुक्त व्यापार समझौता" नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल पुराने टैरिफ मुद्दों को सुलझा रहे हैं. इसके बावजूद, ट्रंप की "अनप्रेडिक्टेबल" यानी अप्रत्याशित विदेश नीति ने कनाडा को अपनी आर्थिक रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है.
कार्नी के "बिल्ड कनाडा" और "बाय कनाडाई" नीति को इसी अमेरिकी दबाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल, कनाडा सरकार सार्वजनिक रूप से इन धमकियों से विचलित नहीं दिख रही है, लेकिन कार्नी का राष्ट्र के नाम संदेश यह संकेत देता है कि ओटावा अब वाशिंगटन की धमकियों के आगे झुकने के बजाय अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.