गिग वर्कर्स की सुरक्षा के लिए पहली बार वैश्विक समझौता मंजूर
नई दिल्ली । डेस्क: संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने जेनेवा में आयोजित अपने 114वें वार्षिक सम्मेलन में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले 'गिग वर्कर्स' के अधिकारों की रक्षा के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता अपनाया है. जेनेवा में सम्मेलन के अध्यक्ष जुआन कैस्टिलो ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी, जिसे वैश्विक स्तर पर फूड डिलीवरी और कार सर्विस जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों के लिए एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' माना जा रहा है.
यह ऐतिहासिक समझौता सभी प्लेटफॉर्म श्रमिकों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे उनकी रोजगार की स्थिति कुछ भी हो.
गौरतलब है कि विश्व बैंक के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 43.5 करोड़ ऑनलाइन गिग वर्कर्स हैं, जो अब तक पारंपरिक श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर थे.
ये कंपनियां अक्सर एल्गोरिदम के जरिए श्रमिकों के काम, भुगतान और प्रदर्शन को नियंत्रित करती हैं, लेकिन उन्हें कर्मचारी के बजाय स्वतंत्र ठेकेदार मानती हैं. इस वजह से कंपनियां न्यूनतम मजदूरी, कार्यस्थल सुरक्षा, बीमारी की छुट्टी (सिक लीव), पेंशन और सामाजिक सुरक्षा देने से बच जाती थीं.
ह्यूमन राइट्स वॉच की वरिष्ठ आर्थिक न्याय सलाहकार लीना सिमेट ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला पहला वैश्विक मानक स्थापित करेगा.
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की प्रणाली में आईएलओ एक अनूठी संस्था है, जहां इसके 187 सदस्य देशों की सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को समान प्रतिनिधित्व प्राप्त है.
इस नए वैश्विक समझौते के तहत अब अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म कंपनियों को श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना होगा. इसमें श्रमिकों को संगठित होने और सामूहिक सौदेबाजी (कलेक्टिव बारगेनिंग) का अधिकार दिया गया है.
साथ ही, यह समझौता स्वचालित प्रणालियों और एल्गोरिदम के फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करता है, जिससे कंपनियों द्वारा श्रमिकों के गलत वर्गीकरण (मिसक्लासिफिकेशन) को रोका जा सके.
मानवाधिकार संगठनों और श्रमिक संघों ने इसे वैश्विक श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है जो अनिश्चितता के दौर में काम कर रहे श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा. File Photo