वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने '3 Fs' पर दिया जोर
मुंबई । डेस्क: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभावों को लेकर देश को आगाह किया है. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए अब '3 Fs' यानी ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertiliser) और विदेशी मुद्रा (Forex) पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है.
वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल और उर्वरक की आसमान छूती कीमतों ने देश की अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया का यह संकट केवल एक कूटनीतिक या भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि ऊर्जा की बढ़ती लागत के कारण इसका सीधा असर देश के आम लोगों और व्यापार जगत पर पड़ेगा.
उनके अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, कार्गो में देरी, महंगी शिपिंग, इनपुट की कमी, वर्किंग कैपिटल पर दबाव और निर्यात ऑर्डर्स में अनिश्चितता जैसी दूरगामी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच वित्त मंत्री ने नकारात्मक और निराशावादी नैरेटिव की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आम जनता द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों को भुलाकर एक कृत्रिम निराशा पैदा की जा रही है, जो पूरी तरह से गलत है.
सीतारमण ने जोर देकर कहा कि मौजूदा चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी कारणों से प्रेरित हैं, जबकि भारत की आंतरिक आर्थिक स्थिति पूरी तरह से सकारात्मक, मजबूत और लचीली बनी हुई है. उन्होंने कहा कि देश इस समय डर का माहौल बर्दाश्त नहीं कर सकता, बल्कि हमें अपने शब्दों और कार्यों से जनता में विश्वास पैदा करने की जरूरत है.
गौरतलब है कि हाल के दिनों में सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की गई है. पिछले 10 दिनों में ही पेट्रोल की कीमत में 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.53 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है.
इस बीच, वित्त मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती के कारण सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका बोझ सरकार खुद वहन कर रही है.