यूरोप में आर्थिक तबाही का डर, जर्मनी और स्पेन युद्धविराम के पक्ष में
बर्लिन । डेस्क: अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को करीब एक महीना बीतने वाला है, और इसके वैश्विक आर्थिक परिणाम अब डराने लगे हैं. जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस संघर्ष को दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक "तबाही" करार दिया है.
ऑस्ट्रेलिया में अपने समकक्ष रिचर्ड मार्लेस के साथ बातचीत के दौरान पिस्टोरियस ने स्पष्ट किया कि इस युद्ध के लिए जर्मनी से कोई सलाह नहीं ली गई थी. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "यह हमारा युद्ध नहीं है और हम इसमें घसीटे जाना नहीं चाहते."
जर्मन रक्षा मंत्री ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि इस युद्ध की न तो कोई ठोस रणनीति है और न ही कोई एग्जिट प्लान, जिसके कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं.
इस बीच, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है. OECD ने ब्रिटेन की 2026 की विकास दर के अनुमान को आधा घटाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि यूरोजोन के विकास अनुमान में भी गिरावट दर्ज की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और राजकोषीय सख्ती ब्रिटेन और यूरोप की विकास दर को बाधित कर रही हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात ठप होने से दशकों का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, जिसके कारण यूरोपीय संघ में प्राकृतिक गैस की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं.
विभिन्न यूरोपीय नेताओं ने भी इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इसे 2003 के इराक युद्ध से भी "कहीं अधिक खराब" स्थिति बताया है. सांचेज़ ने संसद में कहा कि इस युद्ध का प्रभाव बहुत गहरा और व्यापक होगा और इसे किसी भी तरह न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.
वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ईरान के साथ बातचीत और तत्काल शत्रुता समाप्त करने का आह्वान किया है. जर्मनी ने प्रस्ताव दिया है कि यदि युद्धविराम होता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुरक्षित करने के लिए किसी भी शांति अभियान में शामिल होने पर विचार कर सकता है.