गुजरात: नकली QR कोड दवा पकड़ाया
रायपुर | संवाददाता: गुजरात में नकली क्यूआर कोड वाले दवाओं को पकड़ा गया है. गुजरात खाद्य एवं औषध नियंत्रण प्रशासन ने नकली क्यूआर कोड वाले एक बड़े ब्रांड के दवाओं के चार बैच के 850 स्ट्रिप को जब्त किया है. बताया जा रहा है कि इन्हें देश के कई राज्यों में भेजा जाता था. इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इन दवाओं को छत्तीसगढ़ में भी भेजा गया है?
गुजरात खाद्य एवं औषध नियंत्रण प्रशासन की जांच से एक परिष्कृत नेटवर्क का पता चला है, जिसमें थोक विक्रेता और वितरक, नकली दवाओं के अवैध व्यापार में शामिल हैं. इस ऑपरेशन का पैमाना और तरीका एक संगठित साइबर अपराधी नेटवर्क की भागीदारी का संकेत देता है, जिसके पास उन्नत तकनीकी क्षमताये हैं. FDCAअब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ये नकली क्यूआर कोड डेटा चोरी के माध्यम से, विनिर्माण इकाइयों से अवैध रूप से प्राप्त किये गये थे, या उच्च-स्तरीय विशेषज्ञता वाले साइबर अपराधियों द्वारा हेरफेर किये गये थे.
क्यूआर कोड को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ समय पहले देश में दवाओं की प्रामाणिकता बनाये रखने के लिए दवा उद्योग के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया था. निश्चित रूप से, नकली दवाओं का वितरण हाल ही में एक वैश्विक मुद्दा बनकर उभरा है, और भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा. इस पृष्ठभूमि में, स्वास्थ्य मंत्रालय का क्यूआर कोड लागू करने का कदम एक सोचा-समझा निर्णय था, क्योंकि यह दवाओं के स्रोत का पता लगाने और उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने में मदद करता है, साथ ही रोगी के स्वास्थ्य और सुरक्षा को बेहतर बनाता है.
गुजरात एफडीसीए के आयुक्त डॉ. एच.जी. कोशिया ने कहा “हम जांच कर रहे हैं कि क्या ये नकली क्यूआर कोड डेटा चोरी के माध्यम से, विनिर्माण इकाइयों से अवैध रूप से प्राप्त किये गये या उच्च-स्तरीय विशेषज्ञता वाले साइबर अपराधियों द्वारा हेरफेर किये गये हैं. गुजरात एफडीसीए राष्ट्रीय एजेंसियों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित हो और इस धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म किया जा सके.”
गौरतलब है कि पिछले ही माह कोलकाता स्थित अखिल भारतीय केमिस्ट्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICDF) के महासचिव और फार्मास्युटिकल व्यापार नेता जॉयदीप सरकार ने टिप्पणी की कि नकली दवायें अभी भी राज्य के कोने-कोने में प्रचलन में हैं और ये अन्य राज्यों से स्थानीय ट्रेनों और पर्यटक बसों के माध्यम से पश्चिम बंगाल पहुंच रही हैं.
यह सच है कि दवा कंपनियां दवाओं की प्रामाणिकता बनाये रखने और नकली दवाओं को बाजार से खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़तीं. दवा पैकेजों पर क्यूआर कोड शुरू करने का उद्देश्य विनिर्माण प्रक्रिया, दवाओं की सामग्री और समाप्ति तिथि के बारे में पारदर्शिता प्रदान करना था. क्यूआर कोड रोगी को निर्धारित दवा की जानकारी तक आसान पहुंच प्रदान करता है.