154 प्रकाश वर्ष दूर से पृथ्वी को रहस्यमयी संकेत!
नई दिल्ली । डेस्क: नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने 154 प्रकाश वर्ष दूर एक रहस्यमयी ग्रह से आने वाले आलोक संकेतों का पता लगाया है. वैज्ञानिकों ने हाल ही में इन संकेतों के रहस्य को उजागर किया है, जिसने खगोल विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है.
मोरक्को के एक अवलोकन केंद्र से वैज्ञानिक अब्देरहमन सौबकिओउ की अगुआई में एक शोध दल ने इस नये ग्रह की खोज की है, जिसका नाम TOI-1846b रखा गया है. यह ग्रह पृथ्वी से लगभग दोगुना बड़ा और चार गुना भारी है, जिसे 'सुपर अर्थ' की श्रेणी में रखा गया है.
यह ग्रह हर चार दिन में एक ठंडे लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है.
नासा का TESS सैटेलाइट इस ग्रह से आने वाले रहस्यमयी आलोक संकेतों को सबसे पहले पकड़ने में सफल रहा. लंबे समय तक अवलोकन के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इन संकेतों में एक निश्चित पैटर्न है, जो हर साल मार्च के महीने में दिखाई देता है.
जब यह ग्रह अपने तारे की परिक्रमा करता है, तो तारे की रोशनी में हल्की कमी आती है, जो इस ग्रह की मौजूदगी का संकेत देती है.
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह लाल बौना तारा, जिसकी परिक्रमा TOI-1846b करता है, 300 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाला है.
हालांकि, यह ग्रह अपने तारे की परिक्रमा इस तरह करता है कि इसका एक हिस्सा हमेशा तारे की ओर रहता है, जबकि दूसरा हिस्सा हमेशा अंधेरे में डूबा रहता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह के अंधेरे हिस्से में पानी की मौजूदगी हो सकती है.
नासा अब इस ग्रह का और गहन अध्ययन करने के लिए जेम्स वेब टेलीस्कोप का उपयोग करने की योजना बना रहा है.
यह खोज न केवल खगोल विज्ञान में एक नया अध्याय जोड़ रही है, बल्कि यह भी सवाल उठा रही है कि क्या इस ग्रह पर जीवन की संभावना हो सकती है.