हार्ट अटैक से भी ज्यादा लोग हर साल डूबकर मरते हैं
नई दिल्ली । डेस्क: जुबिन गर्ग जैसी लोकप्रिय हस्तियों के निधन के बाद अक्सर लोग समुद्र या नदियों के किनारे खड़े होकर सहम जाते हैं. किसी प्रिय कलाकार को खोने के बाद लोग अचानक सचेत हो जाते हैं. समुद्र की लहरों के साथ खेल रहे बच्चों का हाथ माता-पिता और कसकर पकड़ लेते हैं. लेकिन वास्तविकता यह है कि यह डर केवल कुछ घटनाओं तक सीमित नहीं है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं.
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल 35 हजार से ज्यादा लोग पानी में डूबने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं. साल 2022 में यह आंकड़ा 38,503 था, जबकि 2023 की नवीनतम रिपोर्ट में यह मामूली रूप से घटकर 37,778 रहा.
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 27,508 लोगों की मौत केवल पानी में गिर जाने की वजह से हुई, जबकि अन्य 10,113 लोग विभिन्न स्थितियों में डूबने के शिकार हुए. नाव डूबने से 117 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 3 लाख लोग डूबने से मरते हैं.
NCRB के कुल दुर्घटना आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में कुल 4,44,104 लोगों की आकस्मिक मौत हुई.
इनमें प्राकृतिक आपदाओं से 6,444 मौतें हुईं, जबकि अन्य कारणों से 4.37 लाख लोग मारे गए.
मृत्यु के कारणों में सड़क दुर्घटना पहले स्थान पर (1,97,871 मौतें) है, जिसके बाद दूसरे स्थान पर दिल का दौरा (35,715 मौतें) जैसी अचानक होने वाली मौतें हैं.
हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पानी में डूबने से होने वाली मौतों की कुल संख्या अब हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के आंकड़े को भी पार कर गई है, जो एक बेहद चिंताजनक संकेत है.