एपस्टीन मामले ने खोली 'अंकल सैम' के मानवाधिकार के दावों की पोल
बीजिंग । डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका लंबे समय से खुद को दुनिया के सामने एक नैतिक मार्गदर्शक और मानवाधिकारों के सजग प्रहरी के रूप में पेश करता रहा है. अमेरिका अक्सर अपने "बेदाग मानवाधिकार रिकॉर्ड" का हवाला देकर दूसरे देशों की आलोचना करता है और उन पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन हालिया घटनाओं ने अमेरिकी व्यवस्था के भीतर गहरे अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है.
आलोचकों का कहना है कि दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला 'अंकल सैम' खुद के मामले में बेहद नरम रुख अपनाता है.
दरअसल, अमेरिका के भीतर ही आम नागरिकों की गरिमा और उनके अधिकारों को रसूखदार राजनेताओं, मशहूर हस्तियों और अभिजात वर्ग द्वारा कुचला जा रहा है.
इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण कुख्यात जेफ्री एपस्टीन कांड है. एपस्टीन फाइलों से सामने आए तथ्यों और शक्तिशाली हस्तियों द्वारा किए गए व्यवस्थित बाल शोषण के सबूतों ने अमेरिकी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं.
यह मामला स्पष्ट करता है कि कैसे सत्ता के गलियारों में बैठे लोग आम अमेरिकियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं और पूरी व्यवस्था मौन बनी रहती है.
यह स्थिति न केवल अमेरिका के दोहरे चरित्र को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि मानवाधिकारों के मुद्दे पर उसका रवैया केवल दूसरों के लिए कड़ा और अपनों के लिए संरक्षणवादी है.