शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

AI की बढ़ती ताकत से गहराता पर्यावरण संकट: UN

C

CG Khabar

05 जून 2026, 06:58 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

AI Data Centre
AI Data Centre

नई दिल्ली । डेस्क: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते चलन और इसकी उपयोगिता को लेकर दुनिया भर में उत्साह है, लेकिन इसकी एक बेहद चिंताजनक और अदृश्य कीमत भी चुकानी पड़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि साल 2030 तक एआई का बिजली उपभोग दोगुना होकर वैश्विक बिजली का 3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. 


यह रिपोर्ट उस आम धारणा को खारिज करती है जिसके तहत माना जाता था कि भविष्य में एआई मॉडल अधिक कुशल होने पर कम ऊर्जा की खपत करेंगे.


रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में एआई के कारण होने वाला कार्बन उत्सर्जन अकेले ब्रिटेन (UK) के कुल उत्सर्जन के बराबर हो जाएगा. 


यही नहीं, एआई डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी, दुनिया की पूरी आबादी की पीने के पानी की वार्षिक आवश्यकता से भी अधिक होगा. 


अर्थशास्त्र के 'जेवन्स पैराडॉक्स' सिद्धांत का हवाला देते हुए रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जब तकनीक किसी संसाधन को अधिक कुशल और सस्ता बनाती है, तो उसकी खपत घटने के बजाय और तेजी से बढ़ती है.


इस रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में दुनिया के केवल 32 देशों के पास एआई-विशिष्ट क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें से 90 प्रतिशत क्षमता अकेले अमेरिका और चीन के पास केंद्रित है. 


ऐसे में विकासशील और उपभोग करने वाले देशों पर ई-कचरा और खनिज निष्कर्षण का पर्यावरण बोझ कहीं अधिक पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए पारदर्शिता, सतत उपयोग और सख्त नियमों के साथ जिम्मेदार एआई विकास का एक रोडमैप तैयार करने की पुरजोर वकालत की है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP