एलोन मस्क: 'Oligarchs' के कारण भारत में स्टारलिंक की एंट्री में हो रही देरी
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही कंपनी स्टारलिंक के संस्थापक और अरबपति कारोबारी एलोन मस्क ने भारतीय टेलीकॉम सेक्टर को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ अनाम 'ओलिगार्क्स' (गठबंधन वाले प्रभावशाली कारोबारी) अपने एकाधिकार और व्यावसायिक वर्चस्व को बचाने के लिए भारत में स्टारलिंक के प्रवेश को बाधित कर रहे हैं.
मस्क का यह बयान ग्रामीण और शहरी कनेक्टिविटी के अंतर पर केंद्रित एक सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आया. उन्होंने कहा कि भारत के दूरदराज के लोगों तक डिजिटल पहुंच रोकना जनता के खिलाफ एक बड़ा अपराध है. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि लोग आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि ये कौन लोग हैं जो भारतीय उपभोक्ताओं पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में 4जी और इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा तेजी से बढ़ा है, लेकिन फिर भी ग्रामीण और कठिन क्षेत्रों में डिजिटल खाई बनी हुई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 98.25 प्रतिशत गांवों तक 4जी नेटवर्क पहुंच चुका है, लेकिन मई 2026 तक देश के 11,256 दूरदराज के गांवों में 4जी कवरेज नहीं थी.
इसके अलावा, मार्च 2026 तक देश में कुल 1.093 अरब इंटरनेट सब्सक्रिप्शन में से केवल 440.87 मिलियन ही ग्रामीण क्षेत्रों से थे.
भारतनेट परियोजना के तहत फाइबर बिछाने का काम जारी है, लेकिन परिचालन स्तर पर अब भी कई गांव सेवाएं शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. स्टारलिंक इन्हीं पहाड़ी, द्वीपीय और दुर्गम इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का विकल्प पेश करती है.
भारत में अपनी व्यावसायिक उड़ानों की तैयारी के तहत स्टारलिंक ने आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए देश में 20 गेटवे साइट्स तैयार कर ली हैं.
कंपनी ने भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को देश के भीतर ही सुरक्षित रखने के लिए विशेष सुरक्षा नियंत्रण भी विकसित किए हैं.
स्टारलिंक को इन-स्पेस (IN-SPACe) से 5 साल का कमर्शियल लाइसेंस और दूरसंचार विभाग से जीएमपीसीएस (GMPCS) परमिट जैसे प्रमुख विनियामक अनुमोदन मिल चुके हैं. हालांकि, सेवाएं पूरी तरह से शुरू करने के लिए कंपनी को अभी भी अंतिम सरकारी मंजूरियों का इंतजार है. मस्क के इस तीखे बयान के बाद भारतीय टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छिड़ गई है.