E25 ईंधन ट्रायल: मर्सिडीज बोली- बदलाव धीरे-धीरे हो
मुंबई । डेस्क: भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के अगले चरण को लेकर चल रही तैयारियों के बीच, लग्जरी कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज-बेंज ने नीति निर्माताओं से उच्च इथेनॉल मिश्रण की दिशा में धीरे-धीरे कदम बढ़ाने का आग्रह किया है. कंपनी का कहना है कि वाहन निर्माताओं को वाहनों में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, साथ ही सड़कों पर चल रही पुरानी कारों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी संतोष अय्यर ने बताया कि कंपनी के नए मॉडल पहले से ही E20 पेट्रोल के अनुकूल हैं और न्यू एस-क्लास हाइब्रिड जैसे कुछ मॉडल E25 के लिए भी तैयार हैं. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च इथेनॉल मिश्रण की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम के लिए एक स्पष्ट रोडमैप होना बेहद जरूरी है.
अय्यर के मुताबिक, असली चुनौती नए वाहनों के साथ नहीं, बल्कि भारत में पहले से सड़कों पर दौड़ रहे उन लाखों पुराने वाहनों के साथ है, जिन्हें उच्च इथेनॉल ईंधन के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया था. उन्होंने सुझाव दिया कि इस बदलाव के दौर में पेट्रोल पंपों पर कई ग्रेड के ईंधन विकल्प उपलब्ध होने चाहिए, ताकि पुराने वाहनों के मालिकों के पास अपनी कार के अनुसार सही ईंधन चुनने का विकल्प मौजूद रहे.
देश की सबसे बड़ी लग्जरी कार निर्माता कंपनी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब सरकार ने इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के प्रयासों के तहत E25 पेट्रोल का वाहनों पर परीक्षण शुरू किया है. हालांकि, इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा.
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) इस पर 1.5 लाख किलोमीटर का कड़ा ट्रायल करेगी, जिसके बाद इसकी रिपोर्ट को इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) द्वारा परखा जाएगा. इस बीच, मर्सिडीज-बेंज ने 2026 की पहली छमाही में 9% की बढ़ोतरी के साथ 9,768 वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है.
अय्यर ने साफ किया कि कंपनी को वर्तमान में चल रहे E20 पेट्रोल से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या नहीं आई है. हालांकि बाजार में चल रही चर्चाओं के कारण ग्राहकों की पूछताछ जरूर बढ़ी है, लेकिन कारों के E20 अनुकूल होने की जानकारी मिलने पर वे संतुष्ट हो जाते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईंधन की गुणवत्ता में असमानता ग्राहकों की इस चिंता की एक वजह हो सकती है.
उद्योग के एक अन्य वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा कि भारत में E20 की ओर बदलाव दुनिया के बाकी बाजारों की तुलना में बहुत तेजी से हुआ है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों की उम्मीदों को पूरा करते हुए उद्योग के लिए इतनी जल्दी खुद को ढालने की एक सीमा होती है, इसलिए एक संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है.
गौरतलब है कि भारत ने पहले देशव्यापी E20 लागू करने के लिए 2030 का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में घटाकर 2025 कर दिया गया और देश ने समय से पहले ही इसे पूरे देश में मानक पेट्रोल के रूप में उपलब्ध करा दिया.
उक्त कार्यकारी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को इस समय ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए. उनके अनुसार, ग्राहकों के भरोसे की सबसे बड़ी कमी चार्जिंग व्यवस्था ही है. अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रफ्तार पकड़ता, तो ईवी को अपनाने की दर काफी अधिक होती. इसलिए सरकार को किसी एक तकनीक को जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ाने के बजाय दोनों तकनीकों में निवेश को संतुलित करना चाहिए.
दूसरी ओर, बीएमडब्ल्यू (BMW) ने भी भविष्य की नीतियों के लिए अपनी तैयारियों की पुष्टि की है. बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा कि उनकी कारें E25 ईंधन तक का उपयोग करने के लिए तैयार की जा चुकी हैं और भविष्य के नियमों के अनुसार पूरी तरह से तैयार रहेंगी.