DYFI का आरोप: प्रदर्शनकारियों को 'चलता-फिरता गुआंतानामो बे' बनाकर प्रताड़ित किया गया
नई दिल्ली । डेस्क: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की युवा शाखा 'डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया' (DYFI) अपने कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत और पुलिस प्रताड़ना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने रविवार को पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जबरन खींचकर बसों में ठूंस दिया.
ए.ए. रहीम का दावा है कि पुलिस कार्यकर्ताओं को किसी थाने ले जाने के बजाय एक ऐसी जगह ले गई जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे. वहां महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं को अलग-अलग कर उनके साथ मारपीट की गई.
पुलिस वाहनों की तुलना 'चलता-फिरता गुआंतानामो बे' से करते हुए उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं न तो गिरफ्तारी मेमो तैयार किया गया, न ही परिजनों को सूचित किया गया और न ही चिकित्सीय जांच या मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने जैसे अनिवार्य नियमों का पालन हुआ.
सांसद ने ध्यान दिलाया कि यह बर्बरता ठीक उसी दिन हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अवैध हिरासत पर रोक का आदेश दिया था.
डीवाईएफआई इस याचिका के जरिए पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हिरासतों के लिए सर्वोच्च अदालत से बाध्यकारी दिशानिर्देश तय करने की मांग करेगी. इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू बहस करेंगी और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुभाष चंद्रन के.आर. याचिका दायर करेंगे.
गुआंतानामो बे क्या है?
गुआंतानामो बे (Guantanamo Bay) क्यूबा के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित एक नौसैनिक अड्डा है, जिस पर संयुक्त राज्य अमेरिका का नियंत्रण है. 11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद, अमेरिकी सरकार ने यहां एक उच्च-सुरक्षा वाली सैन्य जेल स्थापित की थी.
इस जेल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के संदिग्धों को बिना किसी मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत में रखने और उनसे पूछताछ करने के लिए किया गया.
यह स्थान दुनिया भर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों, कैदियों को बिना कानूनी अधिकार और सहायता के अनिश्चितकाल तक बंद रखने, और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना (कस्टोडियल टॉर्चर) के आरोपों के लिए कुख्यात हुआ.
यही कारण है कि जब किसी स्थान या वाहन पर गैर-कानूनी हिरासत और बर्बरता के आरोप लगते हैं, तो रूपक (मीटाफर) के तौर पर उसकी तुलना 'गुआंतानामो बे' से की जाती है.