दुर्ग: खाद की कमी, बीज की खराब क्वालिटी पर कांग्रेस का प्रदर्शन
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के नेतृत्व में कांग्रेस ने दुर्ग प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल सहित भारी संख्या में पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दो प्रमुख मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा.
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इन संवेदनशील मामलों पर प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन किया जाएगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने दोनों ही विषयों पर उचित जांच और त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है.
कांग्रेस ने खरीफ सीजन की शुरुआत में ही अन्नदाताओं के सामने खड़े हुए संकट को लेकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया.
ताम्रध्वज साहू ने बताया कि कांग्रेस की टीमों ने जब ग्रामीण क्षेत्रों की सहकारी समितियों का दौरा किया, तो वहां हालात बेहद चिंताजनक मिले. समितियों में डीएपी, यूरिया और पोटाश जैसे बेहद जरूरी उर्वरकों की भारी किल्लत है.
किसानों को उनकी जरूरत का आधा स्टॉक भी नसीब नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है. कहीं यूरिया गायब है तो कहीं डीएपी का अकाल है, जिससे खेती-किसानी की शुरुआत में ही रुकावट आ रही है.
खाद की कमी के अलावा बीज की खराब क्वालिटी और वितरण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि किसान जिस सरना किस्म के धान के बीज की मांग कर रहे हैं, उन्हें उसकी जगह दूसरी अमानक किस्में थमाई जा रही हैं.
कई जगहों से घटिया स्तर के बीज मिलने की शिकायतें आ रही हैं, जिसके कारण किसानों को बीज वापस करने पर मजबूर होना पड़ा है. कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिश के आधार पर ही प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले धान के बीज तथा सभी जरूरी खाद पर्याप्त मात्रा में तुरंत मुहैया कराए जाएं.
इस विरोध प्रदर्शन में रिसाली की निवासी दीपिका गाड़ा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मुद्दा भी प्रमुखता से गूंजा.
पूर्व गृह मंत्री ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में वक्त पर खून न मिलने की वजह से एक मासूम युवती को अपनी जान गंवानी पड़ी.
उन्होंने मांग की है कि इस घोर लापरवाही के दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए. साथ ही पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए तत्काल 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए. साहू का कहना है कि सिर्फ औपचारिक जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि पीड़ित परिवार को ठोस न्याय मिलना चाहिए.