स्कूल बंद होने से 10 साल में सवा दो करोड़ बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई
नई दिल्ली । डेस्क: देश में सरकारी स्कूलों के बंद या मर्ज होने का सीधा असर अब बच्चों की शिक्षा पर दिखने लगा है. नीति आयोग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जिसने करीब 2.26 करोड़ बच्चों के स्कूल छोड़ने में एक बड़ी भूमिका निभाई है.
आयोग की 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' नामक इस रिपोर्ट के मुताबिक, जहां शैक्षणिक सत्र 2014-15 में देश के स्कूलों में 26.95 करोड़ बच्चे नामांकित थे, वहीं 2024-25 तक यह संख्या घटकर 24.69 करोड़ रह गई.
इस दौरान सरकारी स्कूलों का आंकड़ा 11.07 लाख से गिरकर 10.13 लाख पर आ गया. हालांकि, इसी अवधि में निजी स्कूलों की संख्या में इजाफा देखा गया और वे 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गए.
इस गिरावट के पीछे आयोग ने कम प्रजनन दर और 'स्कूलों के विलय' (कंसोलिडेशन) को मुख्य कारण बताया है. दरअसल, सरकार कम छात्र संख्या वाले नजदीकी स्कूलों को आपस में मिला रही है, जिसे शिक्षा कार्यकर्ता बच्चों की पढ़ाई छूटने की बड़ी वजह मान रहे हैं.
जानकारों का कहना है कि घर के पास के स्कूल बंद होने से बच्चे, खासकर ग्रामीण इलाकों में, आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते. अकेले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में ही ऐसे करीब 40,000 स्कूलों को मर्ज किया गया है, जिससे 2030 तक सभी को शिक्षा देने के वैश्विक लक्ष्य (SDG) को झटका लग सकता है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बच्चे शुरुआती कक्षाओं की तुलना में नौवीं और दसवीं (माध्यमिक स्तर) में आते ही तेजी से स्कूल छोड़ रहे हैं, जहां ड्रॉपआउट रेट बढ़कर 11.5 प्रतिशत हो गया है.
केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में जहां लगभग सभी बच्चे अगली कक्षा में पहुंच रहे हैं, वहीं मेघालय, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह स्थिति काफी चिंताजनक है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि बच्चे माध्यमिक स्तर पर गणित जैसे विषयों की बुनियादी समझ (जैसे प्रतिशत और भिन्न) में भी संघर्ष कर रहे हैं, जो उनकी शुरुआती पढ़ाई में रह गई कमियों को दर्शाता है.