11 मई को देशभर के दवा दुकान हड़ताल पर रहेंगे
मुंबई । डेस्क: ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते चलन और सरकारी नीतियों के विरोध में देश भर के दवा व्यापारियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है. दवा विक्रेताओं की शीर्ष संस्था 'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने आगामी 11 मई, 2026 को देशव्यापी 'नेशनल फार्मेसी बंद' का आह्वान किया है. राजस्थान के उदयपुर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह कड़ा फैसला लिया गया, जिसमें देश भर के 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
पहले यह हड़ताल 15 अप्रैल को प्रस्तावित थी, लेकिन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसकी तारीख बदलकर 11 मई कर दी गई है.
संगठन का आरोप है कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना किसी ठोस नियामक ढांचे के काम कर रहे हैं, जिससे न केवल दवा व्यापार से जुड़े 12.40 लाख दुकानदारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि बिना फार्मासिस्ट की देखरेख के दवाएं बेचे जाने से 'सेल्फ-मेडिकेशन' और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहे हैं.
एआईओसीडी ने स्पष्ट किया है कि बंद के दौरान खुदरा और थोक दवा बाजार पूरी तरह ठप रहेंगे, हालांकि मरीजों की सुविधा के लिए अस्पतालों के भीतर स्थित इमरजेंसी फार्मेसी को इस हड़ताल से मुक्त रखा गया.
हड़ताल की प्रमुख मांगें
ई-फार्मेसी पर लगाम: सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या GSR 220(E) और GSR 817(E) को तत्काल वापस लिया जाए, क्योंकि ये नियम ऑनलाइन कंपनियों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कड़े प्रावधानों से बचने का रास्ता देते हैं.
डोरस्टेप डिलीवरी का विरोध: वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा दवाओं की सीधी होम डिलीवरी की योजना को बंद किया जाए, क्योंकि यह स्थानीय फार्मासिस्टों की पेशेवर भूमिका को खत्म करता है.
अनियंत्रित डिस्काउंट पर रोक: बड़ी फार्मेसी चेन और ऑनलाइन पोर्टल्स द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर रोक लगाकर एक समान मूल्य निर्धारण वातावरण सुनिश्चित किया जाए.
नियमों की सख्ती: दवा वितरण में फार्मासिस्ट की अनिवार्य भौतिक उपस्थिति और सख्त पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि दवाओं के दुरुपयोग को रोका जाए.