देशभर में महिलाओं के कुमकुम की जांच ड्रग इंस्पेक्टर करेंगे
नई दिल्ली । डेस्क: अब से देशभर में बिकने वाले कुमकुम की जांच ड्रग इंस्पेक्टर किया करेंगे. भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने धार्मिक स्थलों पर उपयोग किए जाने वाले कुमकुम और रंगीन पाउडर की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है.
केरल उच्च न्यायालय द्वारा सिंथेटिक रंगों के उपयोग पर लिए गए स्वतः संज्ञान के बाद, DCGI ने इसे शीर्ष प्राथमिकता देते हुए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और कॉस्मेटिक्स रूल्स, 2020 के तहत नियमित सैंपलिंग और जांच के आदेश दिए हैं.
DCGI के अनुसार, व्यावसायिक लाभ के लिए पारंपरिक प्राकृतिक पदार्थों की जगह अब सस्ते और जहरीले सिंथेटिक रसायनों का उपयोग किया जा रहा है. ये रंग अक्सर अनियमित छोटी इकाइयों में बनाए जाते हैं, जिनमें कॉपर सल्फेट, लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फेट और मैलाकाइट ग्रीन जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं.
इन रसायनों के उपयोग से त्वचा रोग, आंखों में चोट, श्वसन संबंधी समस्याएं और कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है.
जानकारों का कहना है कि कुमकुम कानूनन 'कॉस्मेटिक्स' की परिभाषा में आता है और इसमें किसी भी हानिकारक तत्व की मौजूदगी इसे मिलावटी घोषित करती है.
अब राज्य नियामकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी निर्माता बिना लाइसेंस के संचालन न करे और उत्पाद पर बैच नंबर, एक्सपायरी डेट एवं सामग्री जैसी अनिवार्य जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित हो.