अबूझमाड़ के डॉ. गोडबोले दंपति को मिला पद्मश्री सम्मान
बस्तर । संवाददाता: बस्तर के सुदूर और नक्सल प्रभावित आदिवासी इलाकों में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई अलख जगाने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले को देश के प्रतिष्ठित 'पॉद्मश्री 2026' पुरस्कार से नवाजा गया है. सोमवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में इस समर्पित दंपति को यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ जैसे अति-संवेदनशील और दुर्गम वनांचल में करीब तीन से चार दशकों तक लगातार मानव सेवा करने के लिए उन्हें यह राष्ट्रीय पहचान मिली है.
इस गौरवशाली पल पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक गौरव और भावी पीढ़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा बताया.
उन्होंने कहा कि गोडबोले दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से खुद को पूरी तरह जनजातीय समाज के कल्याण में झोंक दिया. बस्तर के बारसूर जैसे सुदूर गांवों में रहकर उन्होंने न केवल निःशुल्क इलाज किया, बल्कि उन इलाकों में कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ी और लोगों के भीतर स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना और अटूट विश्वास पैदा किया.
उन्होंने विपरीत हालातों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच काम करके समाज के सामने करुणा और राष्ट्र निर्माण का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है.
वहीं, राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी पद्मश्री से सम्मानित होने पर गोडबोले दंपति को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों मिला यह पुरस्कार सिर्फ दो व्यक्तियों की सफलता नहीं है, बल्कि यह बस्तर के हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन में आई उम्मीद की किरण, उनके प्रति समर्पण और नि:स्वार्थ मानवीय संवेदनाओं का सम्मान है.
डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले ने बस्तर के उन दुर्गम हिस्सों तक बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाईं, जहां सालों तक इलाज की कल्पना करना भी मुश्किल था. आदिवासियों के स्वास्थ्य में सुधार लाने और बच्चों के सुनहरे भविष्य को संवारने में इस दंपति का पूरा जीवन अनुकरणीय रहा है.