विधानसभा का घेराव करेंगे दिव्यांग
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन सेवा संघ ने ऐलान किया है कि 16 जुलाई को राज्य भर के दिव्यांगजन विधानसभा का घेराव करेंगे. यह कदम पिछले तीन सालों से अनसुनी पड़ी छह सूत्रीय मांगों को लेकर उठाया जा रहा है. इन मांगों में सबसे अहम है 21 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित दिव्यांग महिलाओं को 'महतारी वंदन योजना' में शामिल करने की मांग. यह योजना वर्तमान में केवल विवाहित महिलाओं के लिये है.
संघ के सचिव संतोष कुमार टोंडे ने बताया कि सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के कारण कई दिव्यांग महिलायें विवाह नहीं कर पातीं. उन्होंने कहा, "विवाह न होने का मतलब यह नहीं कि उन्हें आर्थिक सहायता से वंचित रखा जाये. महतारी वंदन योजना में विवाह की शर्त को दिव्यांग महिलाओं के लिये दोबारा विचार करना चाहिये. वे भी माँ, देखभाल करने वाली और गृहिणी की भूमिका निभाती हैं और सम्मान के साथ सरकारी सहायता की हकदार हैं."
महतारी वंदन योजना, जो महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करती है, अभी केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित है. संघ का तर्क है कि सामाजिक न्याय और समावेशी कल्याण के सिद्धांत के तहत वैवाहिक स्थिति को बुनियादी आर्थिक अधिकारों का आधार नहीं बनाना चाहिये, खासकर उन लोगों के लिये जो पहले से ही हाशिए पर हैं.
संघ ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है- फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग. संघ ने 127 लोगों की सूची सौंपी है, जिनमें डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार, लेखा अधिकारी, सहकारी निरीक्षक और पशु चिकित्सक शामिल हैं.
इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये सरकारी नौकरियां हासिल कीं. सूची में सात डिप्टी कलेक्टर और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) द्वारा चयनित कई अधिकारी शामिल हैं.
टोंडे ने मांग की है कि सरकार इसकी गहन जांच करे और दोषियों को बर्खास्त करे, क्योंकि वे वास्तविक दिव्यांगों के अवसर छीन रहे हैं.
संघ की प्रमुख मांगें:
फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों का उपयोग करने वाले सरकारी कर्मचारियों की जांच के बाद बर्खास्तगी.
दिव्यांग पेंशन को 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह करना.
2009 से लंबित दिव्यांगों के लिये आरक्षित पदों पर विशेष भर्ती अभियान.
दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों के लिये 3% प्रोन्नति आरक्षण लागू करना, जिसका हिसाब 1 नवंबर 2000 से हो.
21 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित दिव्यांग महिलाओं को महतारी वंदन योजना में शामिल करना.
दिव्यांगों के नाम पर फर्जी तरीके से लिये गए ऋणों की वसूली और वास्तविक दिव्यांगों के लिये बिना गारंटर के ब्याज-मुक्त ऋण की व्यवस्था.
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज होगा. यह प्रदर्शन न केवल दिव्यांगों के अधिकारों की लड़ाई है, बल्कि सामाजिक समावेश और न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है.