दिग्विजय सिंह ने की NTA पेपर लीक पर श्वेत पत्र की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 के रद्द होने से मचे देशव्यापी बवाल के बीच शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा पिछले आठ वर्षों में आयोजित की गई परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के मामलों और उन पर की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी देते हुए एक विस्तृत श्वेत पत्र (White Paper) जारी करने की मांग की है.
दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा है कि सरकार को इस श्वेत पत्र में स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितने पेपर लीक हुए, जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और कितने आरोपियों को सजा मिली या वे बरी हुए.
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने से देश के लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है. छात्रों के तनाव का एक बड़ा कारण यह भी है कि उन्हें पिछली जांचों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है क्योंकि पेपर लीक और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या अन्य एजेंसियों द्वारा की जा रही उनकी अभियोजन प्रक्रिया का कोई समेकित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.
उन्होंने याद दिलाया कि नीट-यूजी 2024 के हजारीबाग पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया वर्तमान में जमानत पर बाहर है, जबकि 2024 की ही यूजीसी-नेट परीक्षा में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिस पर अदालत ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.
2021 में भी जेईई मेन पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. सिंह ने कहा कि छात्रों का खोया हुआ भरोसा वापस जीतने के लिए सरकार को इन सभी मामलों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी.
दूसरी ओर, डीएमके के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है. उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक के किसी भी मामले में अब तक किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिल सकी है.
विल्सन ने संसद में पिछले आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिसंबर 2024 में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया था कि सीबीआई ने नीट-यूजी 2024 पेपर चोरी मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ पांच चार्जशीट दाखिल की थीं.
इसके साथ ही विल्सन ने फरवरी 2024 में पारित हुए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक' को अधिसूचित करने में हुई चार महीने की देरी पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर सरकार गंभीर होती, तो इसे तुरंत लागू किया जाता. लगातार परीक्षाओं के रद्द होने और पेपर लीक की घटनाओं ने अब देश की पूरी परीक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य को एक अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है.