धनबाद बीसीसीएल में 1500 करोड़ का घोटाला
धनबाद । डेस्क: कोल इंडिया की इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में एक ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इस मामले में लगभग 1500 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आई है, जिसकी जांच कोयला मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा की जा रही है. प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया है.
2021 से अब तक के ठेकों की जांच शुरू हो चुकी है. सूत्रों के अनुसार, यह मामला बीसीसीएल के लोदना क्षेत्र, कुजामा, ईस्टर्न झरिया भौंरा के फोर ए पैच, और एनटीएसटी परियोजना से जुड़ा है. संदेह है कि पुरानी परियोजनाओं में भी अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए पुरानी फाइलें भी खंगाली जा रही हैं. बीसीसीएल ने इस मामले से संबंधित पूरी फाइल कोयला मंत्रालय और सीवीसी को सौंप दी है.
तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों को शोकॉज
इस मामले में बीसीसीएल के सीएमडी, फंक्शनल निदेशक, संविदा प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक, निविदा कमेटी, तकनीकी कमेटी, और नोडल अधिकारियों सहित तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है. इन सभी को 20 से 31 अगस्त तक अपना जवाब देना है. इसके अलावा, एक पूर्व निदेशक, जो वर्तमान में किसी अन्य कंपनी में सीएमडी के पद पर हैं, का नाम भी इस प्रकरण में सामने आया है. उन्हें भी नोटिस भेजा गया है.
जांच में पता चला है कि एक आउटसोर्सिंग कंपनी को खनन कार्य के लिए तय मानकों से अधिक का कार्यादेश दिया गया. परियोजना विस्तार के लिए तकनीकी कमेटी, निविदा कमेटी, और फंक्शनल डायरेक्टर की बैठकों में इसकी मंजूरी दी गई थी. 9 जून 2023 और 21 फरवरी 2024 को हुई तकनीकी कमेटी की बैठकों में डेविएशन को मंजूरी दी गई, जिसे बाद में निविदा कमेटी और फंक्शनल डायरेक्टर ने भी हरी झंडी दे दी.
इससे पहले, 5 अगस्त को विजिलेंस महाप्रबंधक ने तकनीकी कमेटी के छह अधिकारियों धनराज अखारे, कुमार राजीव, मिथिलेश कुमार, एसए तालमले, संजय कुमार अग्रवाल, और दीपंकर मैथी को शोकॉज नोटिस जारी किया था. इनसे पूछा गया कि कुजामा में एमडीओ प्रोजेक्ट के लिए डेविएशन की आवश्यकता क्यों पड़ी और 30 प्रतिशत से अधिक डेविएशन का आधार क्या था.
यदि जांच एजेंसियां अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट नहीं होतीं, तो आगे की कार्रवाई हो सकती है, जिसमें पदावनति तक की सजा शामिल हो सकती है. संविदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, और इस विभाग के वर्तमान व पूर्व अधिकारियों की जांच चल रही है.