कोरबा खदान विस्तार जनसुनवाई स्थगित करने की मांग
कोरबा । संवाददाता: एसईसीएल की मानिकपुर खदान विस्तार योजना को लेकर होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले स्थानीय राजनीति और विस्थापितों का असंतोष गहराने लगा है. पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कंपनी के सीएमडी को पत्र भेजकर 21 अगस्त को तय जनसुनवाई को फिलहाल टालने का आग्रह किया है.
उनका स्पष्ट कहना है कि पूर्व में आयोजित जनसुनावइयों के दौरान प्रभावितों से किए गए वादों, लंबित मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का जब तक स्थाई समाधान नहीं निकल जाता, तब तक नई सुनवाई आयोजित करना सिर्फ एक कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाएगा.
इसलिए प्रबंधन को पुरानी जनसुनावइयों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए समस्याओं के निपटारे के बाद ही जनसुनवाई की नई तारीख का ऐलान करना चाहिए.
पूर्व मंत्री ने प्रबंधन की नीतियों और विस्थापन व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भिलाईखुर्द के लगभग 50 पीड़ित परिवारों का जिक्र किया, जिन्हें कथित तौर पर सर्वे और मुआवजे की सूची से बेदखल कर दिया गया है. उन्होंने मांग रखी है कि वंचित परिवारों का दोबारा पूरी निष्पक्षता से सर्वे कराया जाए.
इसके साथ ही मात्र 6 लाख 91 हजार रुपये के एकमुश्त मुआवजे को नाकाफी बताते हुए उन्होंने कहा कि इतने कम बजट में परिवारों का बेहतर पुनर्वास नामुमकिन है. कंपनी को बुनियादी सुविधाओं से लैस सुविकसित कॉलोनियां बनाकर विस्थापितों को बसाना चाहिए.
स्थानीय युवाओं को रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से मकानों को पहुंचे नुकसान की भरपाई और कचांदी नाले के संभावित डायवर्जन पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की. उनका कहना है कि ग्रामीणों की सहमति और पुख्ता वैज्ञानिक अध्ययन के बिना नाले का बहाव बदलना किसानों और भूजल व्यवस्था के हित में नहीं होगा.