दिल्ली छात्र प्रदर्शन: पेलेट गन और लाठीचार्ज के आरोपों की RAF जांच शुरू
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली में जारी छात्र प्रदर्शनों के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग करने और पेलेट गन चलाने के आरोपों के बाद मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने अपनी इस विशेष दंगा-रोधी इकाई के आईजी को सभी घटनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं.
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों की पुष्टि के बाद ही इस मामले में औपचारिक 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' का आदेश दिया जाएगा.
दरअसल, नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के एक समूह ने जंतर-मंतर से संसद की ओर 'चलो संसद' मार्च निकाला था.
इस दौरान हुई झड़प के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें आरएएफ के जवान लाठीचार्ज करते और पेलेट गन संभालते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसके साथ ही कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों की भीड़ द्वारा सुरक्षाकर्मियों को घेरकर उन पर हमला करते देखा जा सकता है.
आरएएफ का कहना है कि दोनों ही पहलुओं के आधार पर पूरी स्थिति का जायजा लिया जा रहा है.
विवाद का मुख्य कारण प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का कथित इस्तेमाल है. इस कार्रवाई में घायल कम से कम दो छात्रों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.
सुरक्षा नियमों के अनुसार, आरएएफ के शस्त्रागार में 12-बोर पंप-ऑक्शन पेलेट गन शामिल होती है, जिसका उपयोग केवल जीवन-घातक स्थिति में और डिफ्लेक्टर के साथ शरीर के निचले हिस्से पर करने का मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) है.
जहां दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उनके पास पेलेट गन नहीं हैं, वहीं आरएएफ और सीआरपीएफ ने भी इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया है.
इसके अलावा, सीआरपीएफ मुख्यालय ने बल के अधिकारियों को बिना अनुमति प्रेस से बात न करने के निर्देश जारी किए हैं.
हाल ही में एक महिला अधिकारी की मीडिया से बातचीत को अनुचित माना गया था. साथ ही, आरएएफ की एक असिस्टेंट कमांडेंट द्वारा इंस्टाग्राम पर की गई टिप्पणियों की भी समीक्षा की जा रही है कि कहीं यह बल की 2023 की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन तो नहीं है, जो कर्मियों को किसी भी विवादित या राजनीतिक मुद्दे पर टिप्पणी करने से रोकती है.