दिल्ली कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस जारी किया
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य लोगों को हरियाणा के शिकोहपुर में एक भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोपपत्र के जवाब में नोटिस जारी किया.
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने कहा कि वह आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का फैसला करने से पहले 11 आरोपियों की सुनवाई करेंगे. अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की गई है.
अदालत ने कहा, "मेरा मानना है कि सभी आरोपियों को संज्ञान लेने के पहलू पर सुनवाई का अधिकार दिया जाना चाहिये."
इसके साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया, "इसलिये, वर्तमान शिकायत के संदर्भ में संज्ञान लेने के प्रश्न पर सुनवाई के लिये शिकायत में शामिल सभी प्रस्तावित आरोपियों को नोटिस जारी किया जाये."
ईडी ने 18 जुलाई को वाड्रा जो कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अभियोजन शिकायत दर्ज की थी. यह मामला 2008 में वाड्रा और रियल एस्टेट फर्म डीएलएफ के बीच हुए कथित अनियमित भूमि सौदे से संबंधित है.
वाड्रा ने इन आरोपों का खंडन किया है और आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार द्वारा गांधी परिवार के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है.
ईडी ने आरोपपत्र दायर करने के अलावा, वाड्रा और उनकी संबद्ध संस्थाओं जैसे स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य की 43 अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी कीमत ₹37.64 करोड़ है.
ईडी ने आरोप लगाया कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने शिकोहपुर में 3.5 एकड़ का एक भूखंड किसानों से ₹7.5 करोड़ में कथित तौर पर गलत तरीकों से, सार्वजनिक सेवकों की मदद से खरीदा था. बाद में इस भूखंड को कथित तौर पर डीएलएफ को ₹58 करोड़ में बेच दिया गया.
यह भूमि सौदा उस समय हुआ जब हरियाणा में भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी.
हरियाणा पुलिस ने 2018 में एक प्राथमिकी दर्ज की थी, और बाद में ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया.