LPG संकट पर फैसला: रिफाइनरियों के लिए 63,810 टन प्रतिदिन का कोटा तय
नई दिल्ली । डेस्क: हालिया पश्चिमी एशिया संकट और ईरान युद्ध के कारण रसोई गैस (एलपीजी) के आयात में आए व्यवधान से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने देश में आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की 21 सार्वजनिक और निजी रिफाइनरियों के साथ-साथ अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए एलपीजी के अधिकतम उत्पादन का अनिवार्य लक्ष्य तय कर दिया है.
इस नई नीति के तहत देश में प्रतिदिन 63,810 टन एलपीजी उत्पादन की क्षमता चिन्हित की गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के दैनिक घरेलू उत्पादन से दोगुनी से भी अधिक है. सरकार की इस दूरगामी रणनीति का मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी वैश्विक तनाव या आपूर्ति संकट की स्थिति में देश के भीतर रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखना और आम नागरिकों को किल्लत से बचाना है.
इंपोर्ट पर निर्भरता और पश्चिम एशिया संकट का असर
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार भारत ने कुल 3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत की थी, यानी रोजाना लगभग 91,000 टन. इसमें से 64 प्रतिशत से अधिक यानी 2.13 करोड़ टन एलपीजी दूसरे देशों से आयात की गई थी. आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज की खाड़ी के संकरे समुद्री मार्ग से आता था. जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण यह मार्ग प्रभावित हुआ, तो भारत में एलपीजी की आपूर्ति ठप हो गई थी.
उस संकट के समय सरकार को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस धाराओं को जबरन एलपीजी की तरफ मोड़ना पड़ा था और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए आपूर्ति रोकनी पड़ी थी. हालांकि, तत्कालीन आपातकालीन उपायों से घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचाया गया था, लेकिन आयात पर भारी निर्भरता ने देश की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया था. उसी अनुभव से सीखते हुए अब यह स्थायी ढांचा तैयार किया गया है.
रिलायंस और अन्य कंपनियों की भूमिका
सरकार द्वारा जारी 13 अगस्त के आदेश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए स्पष्ट कोटा निर्धारित किया गया है. सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर स्थित पुरानी रिफाइनरी (डीटीए) को मिला है, जिसे रोजाना 18,000 टन तक एलपीजी का उत्पादन करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, रूस के रोसनेफ्ट समर्थित नायारा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी के लिए 4,480 टन प्रतिदिन का लक्ष्य तय किया गया है.
सार्वजनिक क्षेत्र की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर कुल 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का जिम्मा सौंपा गया है. इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक गैस से एलपीजी बनाने वाली अपस्ट्रीम कंपनियों जैसे ओएनजीसी और गेल को कुल मिलाकर 6,460 टन रोजाना का लक्ष्य मिला है.
तकनीकी बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
नए नियमों के अनुसार, जब भी बाजार में आपूर्ति बाधित होगी, ये उत्पादन सीमाएं तुरंत लागू हो जाएंगी. कंपनियों को न केवल उत्पादन बढ़ाना होगा, बल्कि एलपीजी के भंडारण, परिवहन और रेलवे या सड़क टैंकरों के जरिए सुचारू निकासी के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा भी विकसित और बनाए रखना होगा.
मंत्रालय ने रिफाइनरियों को तकनीक सुधारने और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के निर्देश दिए हैं. इसके तहत नैफ्था को एलपीजी में बदलने और फ्लूइड कैटालिटिक क्रैकिंग यूनिट्स को अपग्रेड करने जैसे तकनीकी कदम उठाने को कहा गया है ताकि मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता से अधिकतम एलपीजी निकाली जा सके.
हर छह महीने में होगी समीक्षा
सरकार ने आपात स्थिति में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और इसके वैकल्पिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार पूरी तरह अपने पास रखा है. इस उत्पादन ढांचे की समीक्षा साल में दो बार-1 जनवरी और 1 जुलाई को की जाएगी. इससे नई रिफाइनरियों, नए अपस्ट्रीम क्षेत्रों और तकनीकी सुधारों के जरिए बढ़ी हुई क्षमता को समय-समय पर राष्ट्रीय कोटे में शामिल किया जा सकेगा.
सरकार के इस कदम से भविष्य में आयात रुकने की स्थिति में भी देश भर के घरों में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत नहीं होगी.