स्पेस में खुलेंगे डेटा सेंटर: स्टारशिप से बदलेगी पूरी तस्वीर
नई दिल्ली । डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और चैटबॉट्स के बढ़ते चलन के बीच अब एक ऐसी तकनीक पर काम हो रहा है जो कल तक किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसी लगती थी. एआई के लिए बढ़ रही भारी-भरकम कंप्यूटिंग पावर की मांग को पूरा करने के लिए अब अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने की तैयारी चल रही है. अमेरिकी सैटेलाइट स्टार्टअप कंपनी 'ऑर्बिटल' (Orbital) इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है.
कंपनी के संस्थापक और सीईओ इयुविन पून के अनुसार, ऑर्बिटल अगले साल एक साझा पेलोड (Shared Payload) के जरिए अपना पहला डेटा सेंटर सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रहा है. कंपनी ने लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 500 से 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर 100,000 सैटेलाइट स्थापित करने के लिए फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के पास आवेदन भी जमा किया है. इस विशाल नेटवर्क का मकसद 10 गीगावाट की कंप्यूटिंग पावर डिलीवर करना है, जिससे भविष्य के एआई वर्कलोड को आसानी से प्रोसेस किया जा सके.
स्पेसएक्स के स्टारशिप से मिलेगी रफ्तार:
इस दशक के अंत तक जब स्पेसएक्स का 'स्टारशिप' पूरी तरह चालू हो जाएगा, तब अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने की लागत में भारी कमी आएगी. ऑर्बिटल का लक्ष्य उसी समय अपने इस अभियान को बड़े पैमाने पर विस्तार देने का है.
इयुविन पून ने बताया कि आज के समय में अंतरिक्ष में किलोमीटर जितने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करना भले ही काल्पनिक लगे, लेकिन व्यावहारिक रूप से छोटे सैटेलाइट्स के जरिए यह मुमकिन है, जैसा स्टारलिंक ने साबित करके दिखाया है. यह पूरी तरह से बड़े पैमाने पर सैटेलाइट्स को मैनेज करने का खेल है.
पानी और बिजली की समस्या का स्पेस में समाधान:
एआई के दौर में इस रेस में सिर्फ ऑर्बिटल ही नहीं है. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे एलन मस्क की स्पेसएक्स, गूगल, जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन और स्टारक्लाउड (सेंटीमीटर ओरबिट) व केपलर कम्युनिकेशंस जैसे स्टार्टअप भी स्पेस-बेस्ड कंप्यूटिंग की संभावनाओं को तलाश रहे हैं.
अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वहां बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) मिलती रहेगी. इसके अलावा, धरती पर डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए जो लाखों लीटर पानी की बर्बादी होती है, अंतरिक्ष में उस समस्या से भी हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा.
एलन मस्क ने भी हाल ही में एआई डेटा सेंटर्स के लिए अंतरिक्ष में 10 लाख सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना बनाई है.
धरती और आसमान की जुगलबंदी:
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में मौजूद ये डेटा सेंटर्स अगले 10 सालों तक धरती पर मौजूद डेटा सेंटर्स के सहयोगी (कॉम्प्लीमेंट्री) के रूप में काम करेंगे. मौजूदा समय में धरती पर कुल डेटा सेंटर क्षमता करीब 100 गीगावाट है. ऑर्बिटल के 100,000 सैटेलाइट अकेले 10 गीगावाट क्षमता बढ़ा देंगे, और अगर अन्य कंपनियां भी इसमें शामिल होती हैं, तो वैश्विक कंप्यूटिंग क्षमता को दोगुना किया जा सकता है.
अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले ये सैटेलाइट्स आकार में काफी छोटे लगभग एक घरेलू फ्रिज के आकार के होंगे, जिनमें से सोलर पैनल और रेडिएटर्स बाहर निकले होंगे. इन्हें आप 'अंतरिक्ष में तैरते सर्वर रैक्स' कह सकते हैं.
स्पेस में होने वाली यह कंप्यूटिंग मुख्य रूप से 'इन्फ्रेंस' (Inference) के लिए काम करेगी, जहां एआई मॉडल्स नए डेटा के आधार पर तुरंत परिणाम या प्रेडिक्शन तैयार करते हैं. चूंकि अब एआई मॉडल्स पूरी तरह मैच्योर हो चुके हैं और रोज़मर्रा के ऐप्स में इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है, इसलिए आने वाले समय में सारा दारोमदार इसी तकनीक पर टिकने वाला है.