कैंसर के इलाज में 'कस्टम-मेड' mRNA वैक्सीन ट्रायल में सफल
न्यूयॉर्क । डेस्क: लंबे समय से कैंसर का एक सटीक और अचूक इलाज खोजना चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. सौ से अधिक वर्षों की असफलताओं के बाद आखिरकार वैज्ञानिक एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल कर कैंसर को जड़ से मात दी जा सकती है. बायोटेक दिग्गज कंपनी मॉडर्ना और मर्क द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की जा रही 'कस्टम-मेड' एमआरएनए कैंसर वैक्सीन ने अपने अंतिम चरण के परीक्षणों में शानदार सफलता हासिल की है. इस खबर के सामने आते ही वैश्विक चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे व्यक्तिगत कैंसर उपचार (पर्सनलाइज्ड कैंसर थेरेपी) के एक नए युग की शुरुआत करार दिया है.
यह ऐतिहासिक सफलता 'इंटिस्मिरान ऑटोजीन' नामक वैक्सीन के माध्यम से हासिल हुई है. 1,000 से अधिक मरीजों पर किए गए तीसरे चरण के परीक्षण में यह पाया गया कि यह वैक्सीन ट्यूमर को वापस आने या शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने में बेहद कारगर है. यह परीक्षण मुख्य रूप से मेलानोमा यानी स्किन कैंसर से पीड़ित उन मरीजों पर किया गया, जिनकी ट्यूमर सर्जरी हो चुकी थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन और मर्क की कैंसर दवा 'कीट्रूडा' (Keytruda) का संयुक्त उपयोग मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहा है.
एक फोन कॉल और 100 साल के इंतजार का अंत
इस सफलता की घोषणा के पल बेहद भावुक और व्यस्तता से भरे रहे. मॉडर्ना के सीईओ स्टीफन बंसल को जब परीक्षण के सकारात्मक नतीजों का फोन मिला, तो उन्होंने इसकी तुलना साल 2020 में आई कोरोना वैक्सीन की सफलता से की. बंसल के अनुसार, जैसे कोविड के समय पूरी दुनिया संकट में थी, ठीक उसी तरह कैंसर भी एक ऐसी बीमारी है जो लगभग हर परिवार को प्रभावित करती है. हालांकि, इस बड़ी सफलता का जश्न मनाने के लिए वैज्ञानिकों के पास ज्यादा वक्त नहीं था. मर्क रिसर्च लैबोरेटरीज के अध्यक्ष डीन ली और वैश्विक नैदानिक विकास के प्रमुख एलियाव बार ने तुरंत इस डेटा को अंतरराष्ट्रीय बैठकों में प्रस्तुत करने और अमेरिकी एफडीए (FDA) से मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने पर काम शुरू कर दिया.
कैसे काम करती है यह 'पर्सनलाइज्ड' एमआरएनए तकनीक
अब तक विकसित की गई अधिकांश कैंसर वैक्सीन ट्यूमर के केवल एक या दो म्यूटेशन को निशाना बनाती थीं, जिसकी वजह से वे विफल हो जाती थीं. लेकिन एमआरएनए (mRNA) तकनीक ने इस पूरी प्रक्रिया को बदलकर रख दिया है. प्रत्येक व्यक्ति का कैंसर आनुवंशिक रूप से दूसरे से अलग होता है. इस नई तकनीक में मरीज के ट्यूमर से डीएनए निकालकर उसका जेनेटिक सीक्वेंस तैयार किया जाता है. इसके आधार पर एक विशेष वैक्सीन बनाई जाती है जो मरीज के ट्यूमर के 34 विशिष्ट म्यूटेशन को लक्षित करती है.
मर्क की मशहूर दवा 'कीट्रूडा' शरीर के इम्यून सिस्टम यानी टी-सेल्स पर लगे ब्रेक को हटाती है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए आजाद हो जाती हैं. वहीं, यह नई एमआरएनए वैक्सीन इम्यून सिस्टम की इन कोशिकाओं को मरीज के ट्यूमर का सही 'स्केच' या 'गंध' प्रदान करती है. वैज्ञानिक रॉबर्ट लैंगर के अनुसार, 34 अलग-अलग टारगेट होने से प्रतिरक्षा प्रणाली के सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
सालों की असफलता के बाद मिली साझेदारी की सफलता
मॉडर्ना और मर्क के लिए यह मुकाम रातों-रात हासिल नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे 10 से अधिक वर्षों की कड़ी मेहनत और विफलताएं छिपी हैं. वर्ष 2016 में जब दोनों कंपनियों ने इस कैंसर वैक्सीन के लिए हाथ मिलाया था, तब एमआरएनए तकनीक शुरुआती चरणों में थी. मॉडर्ना के पास अत्याधुनिक एमआरएनए तकनीक तो थी, लेकिन बड़ी स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल चलाने के संसाधन नहीं थे. दूसरी ओर, मर्क के पास 'कीट्रूडा' जैसी सफल दवा और विशाल अनुभव था. मर्क ने 2016 में 200 मिलियन डॉलर और 2022 में 250 मिलियन डॉलर का निवेश कर इस साझेदारी को मजबूत किया.
भविष्य की राह और वित्तीय उम्मीदें
इस वैक्सीन की सफलता से चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ वित्तीय बाजार में भी भारी उत्साह है. विश्लेषकों का अनुमान है कि 2030 तक इस वैक्सीन की बिक्री 1 अरब डॉलर और 2035 तक 3 अरब डॉलर को पार कर सकती है. मॉडर्ना के शेयरों में इस खबर के बाद 130 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई है.
अब वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य इस एमआरएनए तकनीक का परीक्षण उन कैंसर प्रकारों पर करना है जिनमें म्यूटेशन की संख्या कम होती है, जैसे कि फेफड़े, गुर्दे और अग्न्याशय (पैनक्रियाज) का कैंसर. यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में कैंसर जैसी भयानक बीमारी का इलाज केवल एक विशेष वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी के जरिए संभव हो सकेगा.