देशभर में सीपीआर जागरूकता सप्ताह की शुरूआत
नई दिल्ली । डेस्क: सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने प्रत्येक नागरिक के लिए सीपीआर के जीवनरक्षक महत्व पर जोर देते हुए सीपीआर जागरूकता सप्ताह 13-17 अक्टूबर का उद्घाटन किया. कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक जीवनरक्षक और महत्वपूर्ण आपातकालीन प्रक्रिया है जो गंभीर हृदय संबंधी मामलों में जीवित रहने की संभावनाओं को बेहतर बनाती है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से आज सीपीआर जागरूकता सप्ताह 13-17 अक्टूबर 2025 का उद्घाटन किया.
गौरतलब है कि एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत में अचानक होने वाली मौत के मामले बारह प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं. एक साल में तिरसठ हजार छह सौ नौ लोगों की अचानक मौत के मामले दर्ज किए गए. जिसमें से पैंतीस हजार छह सौ सैंतीस लोगों की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई है.
सीपीआर जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) में प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है. इस अभियान का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, स्वास्थ्य पेशेवरों, चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सीपीआर जागरूकता सप्ताह के तहत मंत्रालय के दृष्टिकोण पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर घर, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थान पर कम से कम एक व्यक्ति इस जीवनरक्षक तकनीक में प्रशिक्षित हो.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, " देश में अचानक होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक हृदयाघात है, और लगभग 70 प्रतिशत ऐसे मामले वहां होते हैं, जहां अक्सर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती. ऐसे नाजुक क्षणों में, किसी व्यक्ति द्वारा समय पर सीपीआर देने से जीवन की गुणवत्ता में काफ़ी सुधार हो सकता है."
उद्घाटन समारोह के एक भाग के रूप में, प्रतिभागियों ने सीपीआर जागरूकता को बढ़ावा देने और दूसरों को इस जीवनरक्षक तकनीक को सीखने के लिए प्रोत्साहित करने का संकल्प भी लिया. इस कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा हाथों से सीपीआर का लाइव प्रदर्शन किया गया.
लोगों में सीपीआर संबंधी जानकारी के अभाव को ध्यान में रखते हुए और निरंतर समुदाय-केंद्रित प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 13-17 अक्टूबर, 2025 तक अखिल भारतीय सीपीआर जागरूकता सप्ताह मना रहा है, जिसका उद्देश्य आम लोगों में सीपीआर के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ाना और क्षमता निर्माण करना है.
इस सप्ताह के दौरान एक राष्ट्रव्यापी शपथ समारोह, सीपीआर पर भौतिक और आभासी प्रदर्शनों का आयोजन, विशेषज्ञों के साथ बातचीत, पैनल चर्चा और अन्य आईईसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. सीपीआर जागरूकता सप्ताह की शुरूआत में देश भर के चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र के 15,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया.
जान बचा सकता है CPR: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की नई गाइडलाइन
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक आपातकालीन उपचार है जो किसी व्यक्ति की साँस या दिल की धड़कन रुक जाने पर, जैसे कि दिल का दौरा पड़ने या डूबने की स्थिति में, उसकी जान बचाने में मदद कर सकता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने सीपीआर को लेकर नई सलाह जारी की है, जिसमें अब जोर "केवल हाथों से सीपीआर" (Hands-Only CPR) शुरू करने पर दिया गया है.
सीपीआर की मुख्य सलाह
अप्रशिक्षित लोगों के लिए: यदि आप सीपीआर में प्रशिक्षित नहीं हैं या पीड़ित के मुँह पर अपना मुँह नहीं लगाना चाहते हैं, तो केवल हाथों से सीपीआर करें. इसके लिए, छाती के केंद्र में 100 से 120 बार प्रति मिनट की दर से तेज़ और ज़ोरदार दबाव बनाएँ. इसे तब तक जारी रखें जब तक कि चिकित्सकीय मदद न पहुँच जाए. इसमें कृत्रिम साँस (रेस्क्यू ब्रेथ) देने की आवश्यकता नहीं है.
प्रशिक्षित लेकिन अभ्यास से बाहर: यदि आपने पहले सीपीआर प्रशिक्षण लिया है लेकिन आप आश्वस्त नहीं हैं, तो भी आप केवल हाथों से सीपीआर की सलाह का पालन करें और 100 से 120 बार प्रति मिनट की दर से छाती पर दबाव बनाएँ.
प्रशिक्षित और आश्वस्त लोगों के लिए: यदि आप पूरी तरह से प्रशिक्षित और आश्वस्त हैं, तो 10 सेकंड के भीतर नब्ज और साँस की जाँच करें. यदि दोनों नहीं हैं, तो 30 बार छाती पर दबाव के बाद दो बार कृत्रिम साँस दें. इस चक्र को चिकित्सा सहायता पहुँचने तक जारी रखें.
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, यह सलाह वयस्कों, बच्चों और शिशुओं (4 सप्ताह तक के नवजात शिशुओं को छोड़कर) पर लागू होती है. सीपीआर की मदद से ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह मस्तिष्क और अन्य अंगों तक बना रहता है, जो हृदय की धड़कन सामान्य होने तक मस्तिष्क को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण है.