गणित बनेगा एलियंस से संवाद की भाषा, मधुमक्खी ने की मदद
नई दिल्ली । डेस्क: वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि कभी इंसानों का सामना एलियंस से हो, तो उनसे संवाद कैसे किया जाए. अब इस सवाल का जवाब ढूंढने में एक अप्रत्याशित जीव मधुमक्खी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. आठ वर्षों तक चले एक अंतरराष्ट्रीय शोध में सामने आया है कि मधुमक्खियों में आश्चर्यजनक गणितीय क्षमता होती है, जो एलियंस से संवाद के लिए गणित को एक सार्वभौमिक भाषा मानने की दिशा में संकेत देती है.
शोध के अनुसार, मधुमक्खी न केवल जोड़ और घटाव कर सकती हैं, बल्कि वे सम और विषम संख्याओं का अंतर भी समझती हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि ये छोटे कीट ‘शून्य’ की अवधारणा को पहचानने, वस्तुओं की संख्या को क्रमबद्ध करने और यहां तक कि प्रतीकों के साथ संख्याओं को जोड़ने में भी सक्षम हैं. यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल ‘लियोनार्डो’ में प्रकाशित हुआ है, जबकि इस विषय पर विस्तृत चर्चा ‘द कन्वर्सेशन’ में भी की गई है.
शोधकर्ताओं का तर्क है कि यदि मनुष्य और मधुमक्खी जिनके पूर्वज करीब 60 करोड़ साल पहले अलग हो गए थे दोनों गणितीय समस्याएं हल कर सकते हैं, तो गणित को एक सार्वभौमिक भाषा माना जा सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि पृथ्वी के बाहर कोई बुद्धिमान प्रजाति मौजूद है, तो संभव है कि उनमें भी गणितीय समझ हो, जो संवाद का आधार बन सकती है.
2016 से 2024 के बीच किए गए प्रयोगों में मधुमक्खियों को मीठे पानी के प्रलोभन के जरिए खुले वातावरण में गणितीय परीक्षणों में शामिल किया गया. नतीजों ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया, क्योंकि मधुमक्खियों ने बुनियादी अंकगणितीय समस्याओं को सफलतापूर्वक हल किया.
दरअसल, एलियंस से संवाद में गणित के इस्तेमाल का विचार नया नहीं है. नासा के वॉयेजर-1 और वॉयेजर-2 अंतरिक्ष यानों पर लगे गोल्डन रिकॉर्ड्स में गणितीय सूचनाएं उकेरी गई थीं, ताकि किसी अन्य ग्रह की सभ्यता उन्हें समझ सके. इसी तरह, 1974 में भेजे गए एरेसिबो रेडियो संदेश में 1,679 शून्य और एक के माध्यम से संख्याओं और डीएनए से जुड़ी जानकारी दी गई थी.
वैज्ञानिकों का मानना है कि मधुमक्खी पर हुआ यह शोध न केवल पशु बुद्धिमत्ता की समझ को गहराता है, बल्कि भविष्य में एलियंस से संवाद के वैज्ञानिक प्रयासों को भी नई दिशा दे सकता है.