क्या मंगल बनेगा दूसरी पृथ्वी? सूक्ष्मजीवों से लाल ग्रह को बसाने की तैयारी
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और दुनिया भर के वैज्ञानिक मंगल ग्रह को दूसरा 'पृथ्वी' बनाने की कोशिशों में जुटे हैं. हालिया शोध के अनुसार, पृथ्वी के कुछ बेहद शक्तिशाली सूक्ष्मजीव (Microbes) मंगल की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने और वहां इंसानों के रहने योग्य वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सूक्ष्मजीव मंगल पर ऑक्सीजन का उत्सर्जन कर सकते हैं और वहां की मिट्टी को कंक्रीट जैसी मजबूती दे सकते हैं, जिससे भविष्य में मंगल पर घर बनाने के लिए पृथ्वी से निर्माण सामग्री ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
वर्तमान में मंगल एक शुष्क और बेहद ठंडा रेगिस्तान है जहाँ वायुमंडल की परत बहुत पतली है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि अतीत में यह ग्रह गर्म था और यहाँ पानी मौजूद था.
शोधकर्ता डेवन स्टर्क और एरिका डिबेनेडिक्टिस के अनुसार, मंगल को दोबारा उस अवस्था में लाने में सैकड़ों साल लग सकते हैं. शुरुआत में मंगल पर बस्तियाँ अंटार्कटिका की तरह बिखरी हुई और मुख्य रूप से जमीन के नीचे होंगी, जहाँ इंसानों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तरह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहना होगा.
भविष्य में वहां कांच के गुंबद बनाकर खेती की जा सकेगी, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वायुमंडल को घना करने की है ताकि इंसान बिना लाइफ सपोर्ट के वहां घूम सकें.
'फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगल के दक्षिणी हिस्से में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड इन सूक्ष्मजीवों के लिए जीवन रक्षक बन सकती है.
वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से दो बैक्टीरिया की पहचान की है: पहला, 'स्पोरसार्सिना पेस्टुरी' (Sporosarcina pasteurii), जो कैल्शियम कार्बोनेट का उत्पादन कर मंगल की मिट्टी को सख्त बना सकता है ताकि वहां निर्माण कार्य संभव हो सके.
दूसरा, 'क्रुकोसिडियोप्सिस' (Chroococcidiopsis), जो मंगल के चरम मौसम को झेलने और ऑक्सीजन छोड़ने में सक्षम है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया रातों-रात संभव नहीं है और इसके लिए अभी से दीर्घकालिक योजना पर काम करना होगा.