धर्मांतरण कानून: संपत्ति जब्ती प्रावधानों पर SC ने राजस्थान सरकार को नोटिस दिया
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर राजस्थान धर्म के गैरकानूनी रूपांतरण निषेध अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर जवाब मांगा है. याचिका में कानून के उन हिस्सों पर सवाल उठाए गए हैं, जो कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करने वालों की संपत्ति जब्त करने और ध्वस्त करने का अधिकार राज्य को देते हैं.
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप गुप्ता की पीठ ने एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लिया. याचिका में अधिनियम की धारा 5(6), 10(3), 12, और 13 को चुनौती दी गई है.
इन धाराओं में कथित अवैध धर्मांतरण के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान है, जिसमें संपत्ति की जब्ती, कुर्की और ध्वस्तीकरण शामिल है.
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि ये प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले का सीधा उल्लंघन करते हैं, जिसमें उचित नोटिस दिए बिना और आरोपी को बचाव का मौका दिए बिना संपत्ति को गिराने पर रोक लगाई गई थी.
PIL में कहा गया है कि कानून जिला मजिस्ट्रेट या एक राजपत्रित अधिकारी को संक्षेप जांच के आधार पर संपत्ति जब्त करने या गिराने का आदेश देने की अनुमति देता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की जगह मनमाना कार्यकारी विवेक आ जाता है.
याचिका में 2024 में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के एक लैंडमार्क फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि दोष की न्यायिक पुष्टि के बिना कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती.
विशेष रूप से, धारा 5(6) पर आपत्ति जताई गई है, जिसके तहत मासूम मालिकों की संपत्तियों को "सहमति से या बिना सहमति के" जब्त करने की अनुमति मिलती है.
इसे सामूहिक सज़ा और पूर्ण प्रतिनिधिक दायित्व संस्थागत बनाने जैसा बताया गया है. पीठ ने मुख्य याचिका के साथ-साथ इस विवादास्पद कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर भी नोटिस जारी किया है.