केंद्रीय सुरक्षा बलों में IPS कोटा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विवाद
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में 'सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल' पेश करने जा रहे हैं, जिसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), आईटीबीपी (ITBP), एसएसबी (SSB) और सीआईएसएफ (CISF) जैसे विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को एक ही कानूनी ढांचे के भीतर लाना और उनकी सेवा शर्तों को विनियमित करना है.
बिल में आईजी (IG) स्तर के 50 प्रतिशत और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पदों को आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित करने के प्रस्ताव ने अर्धसैनिक बलों के अपने कैडर अधिकारियों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है.
अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और कैडर एसोसिएशनों का तर्क है कि यह विधेयक पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के विपरीत है, जिसमें अदालत ने बलों के अपने कैडर को शीर्ष पदों पर प्राथमिकता देने और आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी.
वर्तमान में, इन बलों के अपने अधिकारी योग्यता के बावजूद महानिदेशक (DG) जैसे शीर्ष पदों तक नहीं पहुंच पाते हैं, क्योंकि ये पद मुख्य रूप से आईपीएस अधिकारियों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं.
आरोप है कि यह बिल गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ लंबित अदालत की अवमानना के मामले के बीच जल्दबाजी में लाया गया है. सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों के संयुक्त मंच ने मांग की है कि इस विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए गृह मंत्रालय की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि यह उनके करियर की प्रगति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को प्रभावित करता है.