पुरुषों के लिए भी आ रही है 'गर्भनिरोधक दवा'
नई दिल्ली । डेस्क: वैज्ञानिकों ने चिकित्सा जगत में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आने वाले समय में परिवार नियोजन के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल सकती है. न्यूयॉर्क की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पुरुषों के लिए एक सुरक्षित, अस्थायी और हार्मोन-मुक्त गर्भनिरोधक प्रक्रिया विकसित करने का दावा किया है.
अब तक गर्भनिरोधक गोलियों या इंजेक्शन का बोझ मुख्य रूप से महिलाओं को ही उठाना पड़ता था, जबकि पुरुषों के पास कंडोम या नसबंदी के अलावा कोई तीसरा ठोस विकल्प नहीं था. लेकिन 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में प्रकाशित यह शोध बताता है कि पुरुषों के लिए भी अब एक प्रभावी विकल्प तैयार है, जिसका शरीर पर कोई स्थायी दुष्प्रभाव नहीं होगा.
वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए 'JQ1' नामक एक यौगिक का उपयोग किया है, जिसे अब तक कैंसर और सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
शोधकर्ताओं ने पाया कि यह यौगिक पुरुषों में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया यानी 'मेयोसिस' (Meiosis) के एक महत्वपूर्ण चरण 'प्रोफेज 1' को बाधित कर देता है.
इस हस्तक्षेप से शुक्राणुओं का उत्पादन अस्थायी रूप से रुक जाता है, लेकिन यह पुरुष के शरीर या उसकी पौरुष क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं पहुँचाता है.
कॉर्नेल रिप्रोडक्टिव साइंसेज सेंटर की निदेशक और आनुवंशिकी की प्रोफेसर पाउला कोहेन के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह प्रतिवर्ती (Reversible) है. यानी जब कोई पुरुष पिता बनना चाहे, तो दवा का सेवन बंद करने के बाद शुक्राणु उत्पादन फिर से सामान्य हो जाएगा और होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.
इस शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह 'हार्मोन-मुक्त' है. पूर्व में पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक बनाने के जितने भी प्रयास हुए, उनमें से अधिकांश हार्मोनल असंतुलन और स्थायी नपुंसकता के डर के कारण सफल नहीं हो सके.
चूहों पर किए गए छह साल के लंबे परीक्षण में यह पाया गया कि तीन सप्ताह तक JQ1 यौगिक देने पर शुक्राणु उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया. वहीं, दवा बंद करने के छह सप्ताह के भीतर प्रजनन क्षमता वापस लौट आई.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानों के मामले में इसे हर तीन महीने में एक इंजेक्शन के रूप में दिया जा सकता है. यह खोज न केवल अनचाहे गर्भ को रोकने में 100 प्रतिशत कारगर साबित हो सकती है, बल्कि यह उन पुरुषों के लिए भी एक वरदान है जो सर्जरी या कंडोम के इस्तेमाल से कतराते हैं. फिलहाल यह तकनीक अपने अंतिम चरणों में है और जल्द ही मानव परीक्षणों के बाद बाजार में उपलब्ध हो सकती है.