वित्त मंत्री के '3F' फॉर्मूले पर कांग्रेस- 'चौथा F' भूल गईं
नई दिल्ली । डेस्क: देश में आर्थिक नीतियों और निवेश के माहौल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पश्चिम एशिया संकट के बीच '3F' यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा भंडार) पर ध्यान केंद्रित करने के बयान के बाद अब कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि वित्त मंत्री देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण 'चौथे F' यानी गिरते निजी निवेश (Falling rates of private investment) को पूरी तरह भूल चुकी हैं.
<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">वित्त मंत्री ने कहा है कि 3Fs- Fuel, Fertilisers और Forex - गंभीर चिंता के विषय हैं।<br><br>लेकिन वह चौथे और सबसे महत्वपूर्ण F को भूल जाती हैं: निजी निवेश की गिरती दर, जो पिछले कुछ वर्षों से लगातार दिखाई दे रही है। कुल FDI प्रवाह में गिरावट आई है और GDP के प्रतिशत के रूप में निजी…</p>— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/2059144955105526136?ref_src=twsrc%5Etfw">May 26, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वित्त मंत्री ने जिन तीन क्षेत्रों को चिंता का विषय बताया है, वे तो ठीक हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लगातार कम हो रहा निजी निवेश देश की आर्थिक सेहत के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है.
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह में गिरावट आई है और जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कॉर्पोरेट निवेश घटकर वर्ष 2014 से पहले के अपने उच्चतम स्तर का लगभग आधा रह गया है.
विपक्ष का आरोप है कि देश के भीतर व्यापक उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी न होने के कारण कंपनियां नए निवेश से कतरा रही हैं. इसके साथ ही सरकार के कथित दमनकारी रवैये और डराने-धमकाने के माहौल को व्यापारिक जगत के लिए एक मानसिक बाधा बताया गया है, जिसके चलते कई भारतीय कारोबारी अब विदेशों का रुख कर रहे हैं.
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि चुनावी प्रबंधन और मतदाता सूचियों के सहारे चुनाव जीतना अलग बात है, लेकिन शालीनता के साथ अर्थव्यवस्था की असल कमियों को स्वीकार कर सुधारात्मक कदम उठाना बिल्कुल अलग मामला है.
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिडबी (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस के मौके पर घरेलू अर्थव्यवस्था को पूरी तरह मजबूत और लचीला बताया था.
उन्होंने कहा था कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी संकटों के कारण ईंधन और सोने के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे उर्वरक की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है. वित्त मंत्री ने संकट के इस दौर में विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और '3F' पर फोकस करने की वकालत करते हुए देश में डर या निराशा का माहौल बनाने वाले आलोचकों को भी कड़ा जवाब दिया था.