समाज को घृणा, कट्टरता और धर्मांधता ने जकड़ लिया है- कांग्रेस अध्यक्ष
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई पर जूते से हमला करने की कोशिश की घटना पर सोमवार 6 अक्टूबर, 2025 को विपक्षी नेताओं ने कड़ी निंदा की. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस "शर्मनाक" और "विवेकहीन" कृत्य को समाज में फैली "घृणा, कट्टरता और धर्मांधता" का प्रतिबिंब बताया.
एक 71 वर्षीय वकील ने अदालती कार्यवाही के दौरान चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोक लिया.
इस घटना को "अभूतपूर्व, शर्मनाक और घिनौना" करार देते हुए, खड़गे ने कहा कि यह "न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर हमला" है.
उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि एक मौजूदा जज, जो योग्यता, ईमानदारी और लगन के बल पर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुंचे हैं, उन्हें इस तरह से निशाना बनाया जाना परेशान करने वाला है. खड़गे ने आगे कहा, "यह एक ऐसे व्यक्ति को डराने और अपमानित करने का प्रयास दर्शाता है, जिसने संविधान को बनाए रखने के लिए सामाजिक बाधाओं को तोड़ा है. ऐसा विवेकहीन कृत्य दर्शाता है कि पिछले एक दशक में घृणा, कट्टरता और धर्मांधता ने हमारे समाज को कैसे जकड़ लिया है."
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बयान में कहा कि इस हमले की निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा, "यह हमला न केवल उन पर है, बल्कि हमारे संविधान पर भी है. चीफ जस्टिस गवई ने बहुत शालीनता दिखाई है, लेकिन राष्ट्र को गहरे दुख और आक्रोश की भावना के साथ एकजुट होकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए."
पूर्व कानून मंत्री और स्वतंत्र राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने इस "असभ्य व्यवहार" की सार्वजनिक रूप से निंदा करने की मांग की और कहा कि यह "न्यायालय के वैभव का अपमान" है. उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कानून मंत्री की चुप्पी पर आश्चर्य व्यक्त किया.
सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने 'एक्स' पर इसे "केवल एक व्यक्तिगत जज पर हमला नहीं, बल्कि पूरे न्यायपालिका के सामने संविधान के बजाय दक्षिणपंथी आचार संहिता का पालन करने की चुनौती" बताया. उन्होंने कहा कि हमलावर के बयानों से स्पष्ट है कि कौन सी विचारधारा ऐसी नफरत फैलाती है.
सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो ने भी वकील के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि यह घटना "हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों द्वारा समाज में इंजेक्ट किए गए मनुवादी और सांप्रदायिक जहर का एक और उदाहरण" है.