उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर कांग्रेस ने जताई हैरानी
नई दिल्ली । डेस्क: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जिसे लेकर कांग्रेस ने गहरी हैरानी जताई है. पार्टी ने इसे 'पूरी तरह अप्रत्याशित' करार देते हुए कहा कि इस इस्तीफे के पीछे कई अनकहे कारण हो सकते हैं.
धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम पर आश्चर्य जताते हुये कहा, "उपराष्ट्रपति का यह अचानक इस्तीफा चौंकाने वाला और समझ से परे है. मैं आज शाम 5 बजे तक उनके साथ अन्य सांसदों के साथ था और 7:30 बजे उनसे फोन पर बात भी हुई थी."
रमेश ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, "निश्चित रूप से धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी, लेकिन इस अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे कुछ और भी है. हालांकि, यह अटकलें लगाने का समय नहीं है."
उन्होंने आगे बताया कि धनखड़ सरकार और विपक्ष दोनों को समान रूप से कठिन सवालों का सामना करने को कहते थे. उन्होंने मंगलवार (22 जुलाई) को दोपहर 1 बजे व्यवसाय सलाहकार समिति की बैठक तय की थी और न्यायपालिका से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं करने वाले थे.
रमेश ने धनखड़ से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और प्रधानमंत्री से उन्हें मनाने की अपील की. उन्होंने कहा, "यह देशहित में होगा और खासकर किसान समुदाय को राहत मिलेगी."
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने धनखड़ को देशभक्त बताते हुए उनके फैसले का सम्मान करने की बात कही.
सिब्बल ने कहा, "उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है, इसे स्वीकार कर हमें आगे बढ़ना चाहिये. मेरे उनके साथ अच्छे संबंध थे. वह खुलकर अपनी बात रखते थे और मन में कोई कटुता नहीं रखते थे."
सिब्बल ने यह भी बताया कि भले ही उनकी विचारधारा अलग थी, लेकिन धनखड़ उन्हें राज्यसभा में बोलने के लिये अतिरिक्त समय देते थे. उन्होंने कहा, "वह चाहते थे कि सरकार और विपक्ष मिलकर भारत की वैश्विक साख को और मजबूत करें."
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था. उनका इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी.