राष्ट्रमंडल खेल: अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में जीता गोल्ड
नई दिल्ली । डेस्क: ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है. त्रिपुरा की प्रतिभावान जूडोका अस्मिता डे और 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. अस्मिता डे ने महिलाओं के -48 किलोग्राम वर्ग में भारत को राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो का पहला स्वर्ण पदक दिलाया, वहीं हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्णिम सफलता हासिल कर देश की खुशी को दोगुना कर दिया.
रोमांचक मुकाबले में कनाडा की खिलाड़ी को दी मात
महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग का फाइनल मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा. अस्मिता डे का सामना कनाडा की मजबूत प्रतिद्वंद्वी हाइडी क्वाच से था. निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली. मैच का फैसला नियमित समय में न हो सका, जिसके बाद मुकाबले को 'गोल्डन स्कोर' राउंड में ले जाया गया. अस्मिता ने अपने धैर्य और सधे हुए दांव-पेच का परिचय देते हुए निर्णायक अंक हासिल किया और भारत की झोली में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक डाल दिया.
साइकिल रिपेयरिंग की दुकान से ग्लासगो के पोडियम तक का सफर
अस्मिता के लिए यह ऐतिहासिक जीत आसान नहीं रही है. उनके इस स्वर्णिम सफर के पीछे संघर्श और समर्पण की एक भावुक कहानी छिपी है. तीन भाई-बहनों वाले परिवार में अस्मिता के पिता एक छोटी सी साइकिल मरम्मत की दुकान चलाकर उनका पालन-पोषण करते थे. अस्मिता का खेलों में आना भी एक दिलचस्प संयोग रहा. शुरुआत में वह एथलेटिक्स में थीं और 800 मीटर दौड़ उनकी पसंदीदा स्पर्धा थी. उन्होंने जिला ट्रायल भी पास कर लिया था, लेकिन उनके कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो का रुख किया, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.
दिवंगत पिता को समर्पित किया ऐतिहासिक पदक
स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता ने बेहद भावुक होकर अपनी इस सफलता को अपने कोच और अपने दिवंगत पिता को समर्पित किया. दिसंबर 2025 में उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था, जिसके बाद वह पूरी तरह टूट चुकी थीं. हालांकि, इस भारी व्यक्तिगत क्षति के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. पिता के निधन के महज दो महीने बाद हुए एशियाई खेलों के राष्ट्रीय ट्रायल्स में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया. अस्मिता ने कहा कि यह पदक उनके, उनके राज्य त्रिपुरा और पूरे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
हर्ष सिंह ने पुरुषों के वर्ग में जमाया सोने पर कब्जा
अस्मिता की स्वर्णिम सफलता के तुरंत बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह ने भी अपना जलवा दिखाया. 23 वर्षीय हर्ष ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कात्ज़ को पटखनी देते हुए पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया. हर्ष के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने जूडो में एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जिसने ग्लासगो में भारतीय दल के अभियान में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.