छत्तीसगढ़ में आम जनता को लगा बिजली का करंट
रायपुर । संवाददाता: गर्मी की तपिश के बीच छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका लगा है. छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे अब प्रदेश में एसी, कूलर चलाना और घरेलू कामकाज करना अधिक खर्चीला हो जाएगा.
हालांकि, बिजली कंपनी ने शुरुआत में 24 फीसदी की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव देते हुए 8.40 रुपये प्रति यूनिट की दर मांगी थी, लेकिन नियामक आयोग ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद जनहित को ध्यान में रखते हुए केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि को ही हरी झंडी दी है. इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्वीकृत औसत बिजली लागत दर 7.13 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है.
नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा असर आम आदमी के बजट पर पड़ेगा. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि व्यावसायिक और गैर-घरेलू श्रेणी में यह वृद्धि 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तय की गई है. किसानों को भी अब कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान करना होगा, हालांकि राहत की बात यह है कि गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंपों को मिलने वाली छूट को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है.
इसके अलावा, किसानों के खेतों की रखवाली के लिए पंप के पास 100 वॉट तक के लाइट-पंखे की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों के छात्रावासों, स्थानीय निकायों के कार्यालयों और छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट व पानी सप्लाई को अब महंगी श्रेणी से हटाकर राहत देते हुए घरेलू श्रेणी (LV-1) में शामिल कर दिया गया है.
आयोग के कानून सदस्य विनोद गनोदवाले, तकनीकी सदस्य अजय कुमार सिंह और सचिव सूर्या प्रकाश शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वितरण कंपनी ने अपनी याचिका में 6304 करोड़ रुपये का घाटा दिखाते हुए बड़ी वृद्धि की मांग की थी. लेकिन गहन समीक्षा के बाद आयोग ने केवल 1662 करोड़ रुपये का घाटा ही मान्य किया.
बिजली बिलों के भुगतान के नियमों में भी कई बदलाव किए गए हैं. अब बिल जमा करने में देरी होने पर लगने वाले 1.5 फीसदी प्रति माह के अधिभार (सरचार्ज) को बदलकर 0.04 प्रतिशत प्रति दिन कर दिया गया है. साथ ही, प्रीपेड मीटर का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट को 1.5 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी और एडवांस पेमेंट करने वालों की छूट को 1.25% से घटाकर 0.75% कर दिया गया है.
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भी आयोग ने अहम कदम उठाए हैं. राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशनों के लिए निम्नदाब पर 7.13 रुपये प्रति यूनिट और उच्चदाब पर 6.42 रुपये प्रति kVAh की दर निर्धारित की गई है.
इसके साथ ही, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट से बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं को क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज से पूरी तरह मुक्त रखा गया है. वहीं, महिला सशक्तिकरण के तहत काम करने वाले पंजीकृत महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों को मिलने वाली 10 प्रतिशत की छूट आगे भी बरकरार रहेगी.
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले ग्राहकों पर टीओडी (TOD) टैरिफ के जरिए सुबह 9 से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल करने पर विशेष छूट की व्यवस्था भी लागू की गई है.