चीन: जंग के मैदान तक 'ह्यूमनॉइड कॉम्बैटेंट' लाने की बड़ी तैयारी
बीजिंग । डेस्क: हाल ही में चीन में आयोजित हुए 'वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स' के दौरान रोबोट्स को दौड़ते, बॉक्सिंग करते और डांस करते देखा गया. हालांकि, इन खेलों के खत्म होने के ठीक दो दिन बाद चीन की सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी - पीएलए) के आधिकारिक समाचार पत्र 'पीएलए डेली' ने इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा.
समाचार पत्र ने वैज्ञानिकों से अपील की है कि वे प्रयोगशालाओं में विकसित हो रही इस तकनीक को सैन्य प्रशिक्षण मैदानों में जल्द से जल्द लाएं ताकि भविष्य में इन्हें सैनिक के रूप में तैनात किया जा सके.
अत्याधुनिक युद्ध की तैयारी में जुटा चीन
सामरिक दस्तावेज, सैन्य खरीद से जुड़े नोटिस और शोध पत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि चीन रक्षा प्रतिष्ठान में ह्यूमनॉइड (मानवरूपी) रोबोट के सैन्य उपयोग को लेकर शोध की गति काफी तेज कर चुका है. चीन का लक्ष्य इन्हें भविष्य के युद्धक्षेत्र में सैनिकों के साथ अग्रिम मोर्चे पर उतारने का है.
पिछले दो वर्षों में इस दिशा में रोबोट की समझ, उनके अंगों के सटीक संचालन और डेटा ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है. व्यावसायिक स्तर पर दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत ह्यूमनॉइड रोबोट का निर्माण करने वाला चीन अपनी इस औद्योगिक क्षमता का उपयोग सीधे सैन्य उद्देश्यों के लिए कर रहा है.
शहरी युद्ध और घुसपैठ मिशनों के लिए खाका
चीन ने शहरी इलाकों में होने वाली जंग के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है. इसके तहत रोबोट्स और मानव सैनिकों के साझा दस्ते इमारतों को सुरक्षित करने और दुश्मन को बेअसर करने का काम करेंगे.
चीनी सैन्य विश्वविद्यालयों में ऐसे अभियानों का सिमुलेशन भी शुरू हो चुका है, जिनमें रोबोट्स को दुश्मन की सीमाओं में घुसपैठ करने, नक्शे तैयार करने और सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा जांच करने की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं.
दूर से नियंत्रण और तकनीकी चुनौतियां
चीन की सरकारी रक्षा कंपनी 'नोरिनको' ने 'फूशी' नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट प्रस्तुत किया है जो पहरेदारी और कठिन परिस्थितियों में जासूसी करने में सक्षम है. इस रोबोट को एक टेलीऑपरेशन सिस्टम के जरिए दूर बैठा इंसान पूरी तरह नियंत्रित कर सकता है, जिससे रोबोट के स्वतंत्र फैसले न ले पाने की कमी दूर हो जाती है.
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक युद्धक्षेत्र की अनिश्चितताओं, ऊर्जा की भारी खपत और कठिन इलाकों में संतुलन बनाने की चुनौतियों के कारण ह्यूमनॉइड रोबोट को पूरी तरह से युद्ध अभियानों में शामिल करने में अभी पांच से दस वर्ष का समय लग सकता है.
वैश्विक सैन्य होड़ और नैतिक सवाल
मानवरूपी रोबोट्स को लेकर यह होड़ सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है. अमेरिका भी अपने सैनिकों की सहायता के लिए सैन्य रोबोट विकसित करने की योजनाओं पर काम कर रहा है. रोबोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, संवेदनशील और जानलेवा परिस्थितियों में इंसानी जान बचाने के लिए मशीन का इस्तेमाल एक बड़ा कारण है.
फिर भी, युद्ध के मैदान में पूरी तरह स्वायत्त हथियारों और रोबोट्स की तैनाती को लेकर नैतिक सवाल उठ रहे हैं. नागरिक और आत्मसमर्पण करने वाले सैनिकों की पहचान करने जैसे जटिल मामलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस जारी है कि घातक प्रहार का अंतिम फैसला हमेशा इंसान के हाथ में ही होना चाहिए.