अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले से चीन गहरे सदमे में
हांगकांग । डेस्क: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई को लेकर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है. बीजिंग ने इस हमले पर “गहरी हैरानी” जताते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और एक संप्रभु देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने एक तीखे बयान में कहा कि अमेरिका का यह कदम न सिर्फ वेनेजुएला के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई है, बल्कि इससे पूरे लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है.
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के कुछ घंटों पहले ही फॉक्स न्यूज से बातचीत में दावा किया था कि उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध हैं और चीन को इस सैन्य अभियान से कोई समस्या नहीं होगी.
ट्रंप ने यह भी कहा था कि रूस, चीन और अन्य देशों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमेरिका वेनेजुएला का तेल उन्हें बेचना जारी रखेगा, बल्कि इसकी मात्रा और बढ़ाई जाएगी.
हालांकि ट्रंप के इन दावों के विपरीत, चीन के विदेश मंत्रालय ने लगभग तुरंत ही अमेरिकी कार्रवाई की निंदा कर दी. मंत्रालय ने कहा, “चीन संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग और उसके राष्ट्रपति को निशाना बनाए जाने से गहराई से स्तब्ध है और इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है.”
बयान में अमेरिका के रवैये को “हेजेमोनिक व्यवहार” करार देते हुए कहा गया कि यह अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है.
चीन ने सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए अपने नागरिकों को वेनेजुएला की यात्रा से बचने की सलाह भी दी है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में सुरक्षा जोखिम “काफी बढ़ गए हैं”. जो चीनी नागरिक पहले से वेनेजुएला में मौजूद हैं, उन्हें गैर-जरूरी बाहर निकलने से बचने, संवेदनशील इलाकों और संघर्ष क्षेत्रों से दूर रहने तथा सभी आवश्यक सावधानियां बरतने को कहा गया है.
दिलचस्प बात यह है कि हमले से ठीक कुछ घंटे पहले मादुरो और उनकी पत्नी ने राष्ट्रपति भवन में चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की थी. इस बैठक में वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज, विदेश मंत्री इवान गिल और वेनेजुएला में चीन के राजदूत लान हू भी मौजूद थे.
सरकारी टीवी चैनल वीटीवी द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य वेनेजुएला और चीन के बीच सहयोग संबंधों की समीक्षा करना था. दोनों देशों के बीच ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, तकनीक और वित्त सहित 600 से अधिक द्विपक्षीय समझौते मौजूद हैं.
चीन ने एक बार फिर विदेशी हस्तक्षेप और एकतरफा दबाव वाले कदमों का विरोध दोहराया है. वेनेजुएला सरकार के अनुसार, बीजिंग ने दिसंबर के अंत में हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में भी यही रुख अपनाया था. उस बैठक में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों की आलोचना की थी.
चीन इससे पहले भी अमेरिकी नौसैनिक तैनाती, प्रतिबंधों के सख्त क्रियान्वयन और तेल टैंकरों की जब्ती की आलोचना करता रहा है. बीजिंग का तर्क है कि इस तरह की कार्रवाइयां नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाती हैं.
चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और अक्सर यह तेल मध्यस्थों के जरिए चीन तक पहुंचता है. बीजिंग का कहना है कि वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी दबाव के अन्य देशों के साथ आर्थिक सहयोग करने का पूरा अधिकार है.
नवंबर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मादुरो के जन्मदिन पर भेजे गए संदेश में भी वेनेजुएला की संप्रभुता के प्रति समर्थन दोहराया था और विदेशी हस्तक्षेप की निंदा की थी. मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर अमेरिका और चीन के बीच तनाव को उजागर कर दिया है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है.