माओवादी आत्मसमर्पण की लहर: अब उदंती एरिया कमेटी ने की अपील
रायपुर । संवाददाता: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हाल ही में हुए माओवादियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण ने नक्सली आंदोलन की कमर तोड़ दी है. इसी कड़ी में, छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय उदंती एरिया कमेटी के एक वरिष्ठ नेता ने इस क्षेत्र के कैडरों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील की है.
माओवादी नेता सुनील के नाम से जारी एक पन्ने के हिंदी पत्र में महाराष्ट्र में सोनू दादा और छत्तीसगढ़ में रूपेश दादा के हथियार के साथ आत्मसमर्पण का हवाला दिया गया है. पत्र में कहा गया है कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और वर्तमान परिस्थितियों में भाकपा (माओवादी) के मिशन को जारी रखने में असमर्थता के कारण सशस्त्र संघर्ष को तत्काल रोक देना चाहिए, हालांकि लोगों की समस्याओं को हल करने का काम जारी रहेगा.
पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है, "इसलिए, गरियाबंद क्षेत्र में हमारी उदंती एरिया ने सशस्त्र आंदोलन को रोकने का फैसला किया है. मैंने गोबरा, सिनापाली, एस.डी.के. (सोनबेड़ा-धरमबांधा-खोलीबातर क्षेत्र), सीतानदी की सभी इकाइयों से जल्द से जल्द फैसला लेने की अपील की है, क्योंकि हम पहले ही कई प्रमुख वरिष्ठ नेताओं को खो चुके हैं. हम सोनू दादा और रूपेश दादा के फैसले का समर्थन करते हैं. अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करो." सुनील ने इस पत्र के साथ क्षेत्र के सदस्यों के लिए अपना मोबाइल नंबर भी साझा किया है.
गरियाबंद जिले के पुलिस प्रमुख निखिल रखेचा ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वे आशावादी हैं कि शेष माओवादी कैडर भी इस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे.
उन्होंने कहा, "हम हथियार के साथ उनके आत्मसमर्पण के लिए उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं." गरियाबंद जिला ओडिशा राज्य से सटा हुआ है और उदंती एरिया कमेटी इस सीमावर्ती क्षेत्र के आस-पास सक्रिय है.
गौरतलब है कि हालिया आत्मसमर्पणों में, शुक्रवार को बस्तर जिले के जगदलपुर में 111 महिलाओं सहित 210 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था. इससे पहले, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वरिष्ठ माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति समेत 60 अन्य कट्टर आतंकवादियों ने भी हथियार डाले थे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मार्च 2026 तक भारत को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराने की पूरी संभावना है.